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Tuesday, February 3, 2026

आतंकी लिंक के बाद फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर सख्ती:पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही दाखिला; बाहरी स्टूडेंट्स-स्टाफ पर निगरानी को 3 टीमें लगी

दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। - Dainik Bhaskar

दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।

दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब किसी भी स्टूडेंट और स्टाफ को यहां जॉइन करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा।

इसको लेकर पुलिस की तरफ से 3 टीमों का गठन किया गया है। जो यहां भर्ती होने वाले स्टाफ और एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट पर नजर रख रही हैं।

इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. उमर नबी ने 10 नवंबर को सुसाइड बाम्बर बनकर दिल्ली के लाल किले के बाहर ब्लास्ट को अंजाम दिया था। जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने यूनिवर्सिटी के 2 डॉक्टरों शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया था।

 यूनिवर्सिटी में बीएससी सहित अलग-अलग डिप्लोमा कोर्स के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। स्टूडेंट को पहले यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, इसके बाद उसको कॉल करके बुलाया जाएगा। यूनिवर्सिटी में जो भी स्टूडेंट एडमिशन लेने के लिए आ रहा है, उसके बारे मे यूनिवर्सिटी के साथ पुलिस भी अपने पास पूरी जानकारी रख रही है।

डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद ने बताया कि यूनिवर्सिटी के एडमिशन प्रोसेस और स्टाफ जॉइनिंग को लेकर इस बार पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। पुलिस की 3 टीम इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। एडमिशन लेने से पहले स्टूडेंट के बारे में पूरी जानकारी लेकर उससे संबधित थाने से भी उसकी पूरी जानकारी ली जाएगी।

आतंकी मॉड्यूल केस में नेशनल जांच एजेंसी (NIA) ने दो अन्य डॉक्टरों शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया था ।
आतंकी मॉड्यूल केस में नेशनल जांच एजेंसी (NIA) ने दो अन्य डॉक्टरों शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया था ।

डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद ने बताया कि, यूनिवर्सिटी की दाखिला प्रक्रिया और स्टाफ नियुक्ति लेकर इस बार पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं। पुलिस की तीन टीमें इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। दाखिले लेने से पहले स्टूडेंट के बारे में पूरी जानकारी लेकर उससे संबधित थाने से पूरी जानकारी ली जाएगी।

डीसीपी एनआइटी मकसूद अहमद ने बताया कि यूनिवर्सिटी की दाखिला प्रक्रिया और स्टाफ नियुक्ति लेकर इस बार पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड़ पर है।
डीसीपी एनआइटी मकसूद अहमद ने बताया कि यूनिवर्सिटी की दाखिला प्रक्रिया और स्टाफ नियुक्ति लेकर इस बार पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड़ पर है।

यूनिवर्सिटी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद यहां से आंतक के नेटवर्क में शामिल डॉक्टरों के गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने लगातार स्टाफ से पूछताछ की है। जिससे परेशान होकर मेडिकल और दूसरे विभागों का कुछ स्टाफ छोड़कर जा चुका है। स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए भर्ती की जाने की योजना है। यहां पर जो स्टाफ भर्ती होगा उसे भी पुलिस वेरिफिकेशन करानी होगी।

यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन लाने के लिए प्रबंधन को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
यूनिवर्सिटी में नए एडमिशन लाने के लिए प्रबंधन को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

 सूत्रों ने यह भी बताया कि आतंकी मॉड्यूल में नाम आने के बाद यूनिवर्सिटी की बदनाम हुई। ऐसे में नए एडमिशन लाने के लिए प्रबंधन को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। एडमिशन के लिए स्टाफ में शामिल सहायक प्रोफेसर और गैर शैक्षणिक स्टाफ की भी ड्यूटी लगाई है। उनको बोला गया है कि वह लोगों में जाकर यूनिवर्सिटी की छवि सुधारने की कोशिश करें।

MBBS फाइनल ईयर के छात्र शोभित ने बताया कि पहले जिस तरह से स्टूडेंट्स यहां पर आवेदन करने में रुचि दिखाते थे, इस बार ऐसा नहीं दिख रहा। दिल्ली ब्लास्ट के बाद सभी इस यूनिवर्सिटी के नाम को अपने साथ जोड़ने में डरते हैं। उन्होंने कहा कि जब वो यहां से दूसरी जगह जाएंगे तो उनको भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) में यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी कोटे को लेकर 28 जनवरी को सुनवाई होनी है। इससे पहले NCMEI के दिल्ली मुख्यालय में 4 दिसंबर को सुनवाई हुई थी। ये सुनवाई आयोग द्वारा 24 नवंबर को यूनिवर्सिटी को जारी किए उस नोटिस को लेकर हुई थी। जिसमें पूछा गया था कि जब उसके डॉक्टरों की दिल्ली में 10 नवंबर को हुए विस्फोट में भूमिका को लेकर जांच चल रही है, जिसमें 15 लोग मारे गए थे, तो ऐसे में उसका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए।

4 दिसंबर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के माइनॉरिटी कोटा को लेकर हुई सुनवाई में यूनिवर्सिटी की तरफ से वकील मोहम्मद आरिफ मौजूद हुए थे। इसमें हरियाणा विभाग के प्रमुख सचिव नहीं पहुंचे थे। जिसको लेकर आयोग ने अगली सुनवाई की डेट तक या इससे पहले जबाव दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

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