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Sunday, March 22, 2026

करंट से जिंदगी खत्म: मां की आंखों के सामने तड़पता रहा युवक


मृतक भूपेंद्र का फाइल फोटो।

करंट से जिंदगी खत्म: मां की आंखों के सामने तड़पता रहा भूपेंद्र, एल्युमिनियम पाइप बना मौत का कारण | The Airnews

चरखी दादरी,(Sahil Kasoon )– गांव काकडोली सरदारा में 19 वर्षीय युवक भूपेंद्र की मौत एक दर्दनाक हादसे में हो गई। खेत में सिंचाई की तैयारी कर रहा यह युवक जब एल्युमिनियम का पाइप उठा रहा था, तभी वह पास से गुजर रही हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आ गया। ये घटना सिर्फ एक बिजली के झटके की नहीं, एक मां की आंखों के सामने उसके जवान बेटे के जीवन की आखिरी सांसें गिनने की भी है।

 हादसे की पृष्ठभूमि

भूपेंद्र, जो काकडोली सरदारा गांव में अपने परिवार के साथ रहता था, अपने खेत में कपास की बुवाई की तैयारी कर रहा था। यह समय है जब किसान खेतों को सिंचाई के लिए तैयार करते हैं, नहर या मोटर से पानी खेतों तक लाने के लिए पाइपों का इस्तेमाल करते हैं। भूपेंद्र भी यही कर रहा था — एक पाइप को उठाकर दूसरे स्थान तक ले जा रहा था।

लेकिन यह कोई आम पाइप नहीं था — यह एल्युमिनियम का था, जो बिजली के संपर्क में आते ही विद्युत प्रवाह को सीधे व्यक्ति तक पहुंचा देता है। जब भूपेंद्र ने पाइप उठाया, तभी वह 11 हजार वोल्ट की लाइन से टच हो गया। इतना उच्च वोल्टेज किसी भी इंसान के लिए जानलेवा होता है।

 मां की आंखों के सामने जीवन की अंतिम घड़ियां

यह हादसा और भी दर्दनाक तब बन गया जब पता चला कि भूपेंद्र की मां उसी समय उसी खेत में मौजूद थीं। वे जई (पशु चारा) काट रही थीं और अपने बेटे को खेत में काम करता देख रही थीं। एक पल में ही सब बदल गया। जैसे ही पाइप लाइन से टच हुआ, भूपेंद्र जोर से चिल्लाया और नीचे गिर गया। उसकी मां ने तुरंत चीख-पुकार शुरू कर दी, आस-पास के ग्रामीणों को बुलाया और आनन-फानन में उसे चरखी दादरी सिविल अस्पताल पहुंचाया गया।

 अस्पताल की पुष्टि: “अब यह सिर्फ एक शव है”

दादरी सिविल अस्पताल में चिकित्सकों ने जब उसे जांचा, तो उन्होंने भूपेंद्र को मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही उसकी मां और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। युवक की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिजली विभाग की लापरवाही कैसे अनमोल जिंदगियों को लील रही है।

 बिजली लाइन की ऊंचाई पर सवाल

परिजनों का आरोप है कि 11 हजार वोल्ट की यह लाइन करीब दो साल पहले ही उनके खेत से गुजारी गई थी। लेकिन इसकी ऊंचाई बहुत कम है, जिससे किसी भी समय इस प्रकार की दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि उन्होंने विभाग को कई बार इसकी शिकायत की थी, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।

“अगर यह लाइन सही ऊंचाई पर होती, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता” – मृतक की मां।

बिजली विभाग की यह उदासीनता अब एक घर के चिराग को बुझा चुकी है। अब गांव के लोग मांग कर रहे हैं कि इस लाइन को तुरंत ऊंचा किया जाए ताकि आगे कोई और भूपेंद्र न मरे।

 भूपेंद्र: एक होनहार छात्र, अधूरी रह गई जिंदगी

भूपेंद्र गांव के सरकारी स्कूल में बारहवीं कक्षा का छात्र था। वह पढ़ाई में तेज था और अपने परिवार का सहारा बनना चाहता था। उसके चाचा कृष्ण ने बताया कि वह अविवाहित था और हमेशा अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा करना चाहता था। उसका एक बड़ा भाई भी है।

भविष्य की अनगिनत योजनाएं, सपने, और जिम्मेदारियों का बोझ — सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया।

पुलिस की भूमिका: “इत्तफाकिया मौत”

बाढ़ड़ा थाना पुलिस के जांच अधिकारी एचसी रविंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के बाद वह अस्पताल पहुंचे। उन्होंने परिजनों के बयान दर्ज किए और पोस्टमॉर्टम की कागजी कार्रवाई पूरी की। फिलहाल इसे “इत्तफाकिया मौत” मानकर कार्यवाही की गई है। हालांकि, स्थानीय लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह केवल एक इत्तफाक था, या बिजली विभाग की लापरवाही ने एक हत्या का रूप ले लिया?

 सवाल जो उठते हैं

  1. क्या 11 हजार वोल्ट की लाइन खेतों के ऊपर इतनी कम ऊंचाई पर होनी चाहिए?

  2. क्या बिजली विभाग ने किसानों को किसी प्रकार की चेतावनी दी थी?

  3. क्या ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई निगरानी प्रणाली है?

  4. क्या इस दुर्घटना की जवाबदेही सिर्फ “इत्तफाक” कहकर खत्म की जा सकती है?

  • एक मां की पुकार

भूपेंद्र की मां की आंखों में अब सिर्फ आंसू हैं। वह बार-बार यही कह रही हैं:

“मैंने उसे अपनी आंखों के सामने जाते देखा… सरकार से बस यही मांग है कि किसी और मां की गोद न उजड़े।”

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