बंसीलाल की 3 पीढ़ी हरा चुके धर्मबीर चुनाव नहीं लड़ेंगे:भाजपा सांसद बोले-बहुत लड़ लिया, अब आराम चाहता हूं; अगले महीने 70 के हो रहे
रियाणा के 3 बार CM रहे चौधरी बंसीलाल की 3 पीढ़ी को 4 बार हराने का अनूठा रिकॉर्ड रखने वाले चौधरी धर्मबीर सिंह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे। वह भिवानी-महेंद्रगढ़ से लगातार तीसरी बार भाजपा के टिकट पर सांसद हैं। 25 नवंबर को उनकी उम्र 70 साल हो जाएगी।
धर्मबीर सिंह ने कहा कि अब सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का समय आ रहा है। पहले जमाने में उम्र के पड़ाव को चार भागों में बांटा गया था। उसी हिसाब से काम होता था। अब भी वही है। इसके हिसाब से अगले चुनाव तक उनकी उम्र काम करने की नहीं रहेगी।
नारनौल में शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि बहुत चुनाव लड़ लिए, अब आराम चाहता हूं। इसलिए अगला चुनाव नहीं लड़ना चाहता। पहले लोग 100 साल तक जीते थे। इसलिए हमारे पूर्वजों ने उम्र चार पड़ाव में बांटी थी। 25, 50, 75 और 100। उसी अवस्था के हिसाब से उन्होंने काम भी बांट दिए थे।
25 में ये करोगे, 50 में यह और 75 में यह काम करोगे। मैं अगले महीने 70 साल का हो जाऊंगा, तो किसी अवस्था में तो रहने दोगे। मेरे ऊपर भी वहीं नियम लागू होने चाहिए, जो पूर्वजों ने लागू किए थे।
एक सवाल के जवाब में सांसद ने कहा कि साल 2014 में भाजपा के टिकट पर पहला चुनाव लड़ा। तब चरखी दादरी और भिवानी जिलों में लगभग 5400 वोटों से पिछड़ा था। अब साल 2024 के चुनाव में भी इन्हीं दो जिलों में करीब 5200 वोटों से पिछड़ा। असल में वहां के लोग थोड़ा जल्द उग्र होने वाले हैं। यहां का ही नहीं, पूरे देश का यही हाल है, वे जहां-जहां रहते हैं, उनका यही हाल है। जबकि महेंद्रगढ़ जिला के लोग राष्ट्रवादी ज्यादा हैं।
असल में भिवानी व चरखी दादरी जाट बाहुल्य हैं। धर्मबीर सिंह भी जाट समाज से हैं, लेकिन जाट वोटरों का भाजपा की तरफ कम रुझान रहता है। जबकि भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर पड़ने वाला महेंद्रगढ़ जिला अहीर बाहुल्य है। यहां भाजपा का प्रभाव ठीक-ठाक है।
25 नवंबर 1955 को भिवानी के तालु गांव में जन्मे धर्मबीर सिंह ने 1983 में राजनीति में कदम रखा। ग्रेजुएशन के बाद पहला चुनाव 1983 में बवानीखेड़ा पंचायत समिति सदस्य बनने के लिए लड़ा था और जीत दर्ज की थी। इसके बाद वे 1985 में पंचायत समिति के चेयरमैन बन गए। पंचायत समिति के चुनाव के बाद सीधे विधानसभा का चुनाव लड़ने उतरे और वो भी पूर्व सीएम बंसीलाल के सामने उन्हीं के गढ़ तोशाम में। 1987 में हुए इस चुनाव में चौ. देवीलाल की पार्टी लोकदल के प्रत्याशी बने। इस चुनाव में बंसीलाल को हराया। हालांकि यह चुनाव विवाद में भी आया। हालांकि बंसीलाल को हराने का इनाम यह मिला कि वे परिवहन मंत्री बन गए।उसके बाद 1991 में कांग्रेस के टिकट पर तोशाम हलके से फिर बंसीलाल के सामने उतरे। लेकिन हार गए। फिर 1996 में फिर बंसीलाल के सामने लड़े लेकिन हार गए। उस वक्त बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी थी, जिसकी सरकार बनी। 1999 में भिवानी से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। अगला चुनाव तोशाम से लड़ा और इस बार बंसीलाल के बेटे सुरेंद्र सिंह को हराया।साल 2014 में जब राव इंद्रजीत सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए, तब धर्मबीर सिंह भी भाजपाई बन गए। उसके बाद साल 2014 और 2019 में भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी को हराया। साल 2024 में श्रुति चौधरी का टिकट कटा और कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी राव दान सिंह को टिकट दिया, लेकिन धर्मबीर सिंह की जीत की हैट्रिक नहीं रोक पाए।
अगला लोकसभा चुनाव यदि निर्धारित समय पर होता है तो साल 2029 में चुनाव होंगे। तब तक गुरुग्राम सांसद राव इंद्रजीत 78 साल के हो जाएंगे। भिवानी-महेंद्रगढ़ सांसद धर्मबीर सिंह 74 साल के होंगे। फरीदाबाद सांसद कृष्णपाल गुर्जर 72 साल के होंगे। करनाल से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर 75 पार होंगे। धर्मबीर सिंह को छोड़कर बाकी किसी नेता ने सक्रिय राजनीति से संन्यास के संकेत नहीं दिए हैं। राव इंद्रजीत ने जरूर अपनी सियासी वारिस के तौर पर बेटी आरती राव को आगे किया है।




