यमुनानगर में शहीद का सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार:7 वर्षीय बेटे ने दी चिता को मुखाग्नि; मां-पत्नी बेसुध हुई, मंत्री राणा-MLA घनश्याम पहुंचे

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए सड़क हादसे में शहीद यमुनानगर के सुधीर नरवाल का पार्थिव शरीर आज शनिवार को उनके पैतृक गांव शेरपुर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने भी शहीद को पुष्प भेंट किया। ग्रामीणों ने शहीद अमर रहे के नारे लगाए।
जानकारी के अनुसार, शहीद सुधीर नरवाल का पार्थिव शरीर शुक्रवार रात अंबाला कैंट एयरपोर्ट पहुंच गया था। इसके बाद उनकी पार्थिव देह शनिवार को सेना के काफिले के साथ गांव शेरपुर पहुंची। बड़ी संख्या में लोग उनका इंतजार कर रहे थे। तिरंगे में लिपटा शव देख शहीद सुधीर की मां के साथ अन्य परिजनों के भी आंसू छलक आए।
शहीद सुधीर के सात वर्षीय बेटे अयांश ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे के हाथों पिता को मुखाग्नि दिए जाने का दृश्य देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें छलक पड़ीं। पत्नी रूबी और मां उर्मिला देवी बार-बार बेसुध होती रहीं, जिन्हें रिश्तेदारों और गांव की महिलाओं ने संभाला।
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सेना के जवानों ने शहीद सुधीर के शव को ग्रामीणों के दर्शनार्थ रखा। उनके शरीर पर लिपटा तिरंगा भी परिजनों को भेंट किया। इसके बाद लोगों ने पुष्प अर्पित कर उनके अंतिम दर्शन किए। वहीं सेना के अधिकारी ने ग्रामीणों व परिजनों को सुधीर के साथ हुए हादसे और उनके साहस के बारे में जानकारी दी। इस दौरान ग्रामीणों ने शहीद अमर रहे के नारे लगाए।

वर्ष 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए सुधीर नरवाल देश सेवा के जज्बे से ओतप्रोत थे। करीब दो साल पहले ही उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में हुई थी। डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास सेना की गाड़ी 400 फीट गहरी खाई में गिरने से यह हादसा हुआ, जिसमें 10 जवान शहीद और 11 घायल हो गए।
शहीद सुधीर नरवाल अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता हरपाल सिंह का वर्ष 2017 में निधन हो चुका था। पिता के बाद परिवार की जिम्मेदारी सुधीर के कंधों पर थी। वह दो बहनों के इकलौते भाई थे। उनकी शहादत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
सुधीर नरवाल के दिल में बचपन से ही देश सेवा का जज्बा था। कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। करीब दो साल पहले ही उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई थी। शहीद के परिवार में अब मां उर्मिला देवी, पत्नी रूबी और सात साल का बेटा अयांश ही रह गए हैं। मां का सहारा, पत्नी का जीवनसाथी और बेटे का पिता देश के लिए बलिदान हो गया। यह दृश्य हर किसी को भावुक कर रहा है।

परिजनों के अनुसार, सुधीर आखिरी बार दिवाली पर छुट्टी लेकर घर आए थे। बुधवार को ही उन्होंने मां, पत्नी और बेटे से फोन पर बात की थी और कहा था कि वह जल्द घर आएंगे। परिवार में फरवरी में शादी समारोह की तैयारियां चल रही थीं, जिसमें आने का उन्होंने पूरा भरोसा दिलाया था, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि यह बातचीत आखिरी साबित होगी।
गुरुवार शाम को जब पत्नी रूबी खेतों की ओर गई हुई थीं, तभी आर्मी ऑफिसर का फोन आया। शहादत की खबर सुनते ही वह बेसुध होकर गिर पड़ीं। गांव वालों ने उन्हें संभाला और घर पहुंचाया।




