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हरियाणा में SE सस्पेंशन विवाद पर गरमाया सियासी माहौल: रोहतक में बोले मंत्री महिपाल ढांडा – “कोर्ट को देखकर निर्णय देना चाहिए, अधिकारी फोन नहीं उठाएंगे तो बख्शा नहीं जाएगा”


पत्रकारों से बात करते शिक्षामंत्री महिपाल ढांडा।

हरियाणा में SE सस्पेंशन विवाद पर गरमाया सियासी माहौल: रोहतक में बोले मंत्री महिपाल ढांडा – “कोर्ट को देखकर निर्णय देना चाहिए, अधिकारी फोन नहीं उठाएंगे तो बख्शा नहीं जाएगा”

The Airnews | रिपोर्टर: Sahil Kasoon
स्थान: रोहतक / चंडीगढ़ | प्रकाशन तिथि: 23 अप्रैल 2025


हाईकोर्ट द्वारा सस्पेंशन रद्द करने के बाद उठे सवाल, मंत्री का तीखा बयान

हरियाणा के रोहतक में उस समय राजनीतिक माहौल गर्मा गया जब कैबिनेट मंत्री महिपाल ढांडा ने एक पत्रकार वार्ता में बिजली निगम के SE हरि दत्त के सस्पेंशन पर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल खड़े किए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि:

“कोर्ट को पूरी जानकारी के बाद ही फैसला लेना चाहिए। हम कोर्ट को कोई ज्ञान नहीं दे रहे, लेकिन अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा अगर वह मंत्री या विधायक का फोन तक न उठाए।”


मंत्री ढांडा की नाराजगी का कारण क्या है?

घटना करीब 6 दिन पहले की है जब जींद जिले में किसानों की बिजली संबंधी समस्याओं पर चर्चा के दौरान मंत्री महिपाल ढांडा ने SE हरि दत्त को फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। इससे पहले भी अधिकारी की इसी प्रकार की शिकायतें मिल चुकी थीं।

मंत्री ने ऊर्जा मंत्री अनिल विज को यह जानकारी दी, और इसके तुरंत बाद चंडीगढ़ में हुई बैठक में कार्रवाई के आदेश दे दिए गए। जल्द ही DHBVNL हिसार की तरफ से हरि दत्त का सस्पेंशन ऑर्डर जारी कर दिया गया।


कोर्ट से राहत मिलने पर बढ़ा विवाद

सुपरिटेंडेंट इंजीनियर हरि दत्त ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने निलंबन को चुनौती दी। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि अधिकारी की रिकवरी परफॉर्मेंस कमजोर रही थी और विभाग चार्जशीट की तैयारी कर रहा है।

हालांकि, कोर्ट ने सरकारी दलीलों को तकनीकी रूप से कमजोर करार देते हुए सस्पेंशन आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि सरकार चाहे तो कानून अनुसार फिर से कार्रवाई कर सकती है।
कोर्ट के आदेश की कॉपी…


मंत्री का सख्त रुख – “अब अधिकारी नहीं बचेंगे”

मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि अब उन अधिकारियों को सुधरना होगा जो जनप्रतिनिधियों के कॉल या फरियाद को नजरअंदाज करते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:

“जो अधिकारी मंत्री-विधायक के फोन को नजरअंदाज करते हैं, उन्हें भविष्य में नहीं बख्शा जाएगा। अधिकारी यह न सोचें कि कोर्ट के सहारे कोई कुछ नहीं कर सकता।

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