हिसार जेल से थोड़ी देर में बाहर आएगा रामपाल:दिल्ली नंबर की डिफेंडर गाड़ी पहुंची, सोनीपत जाने की चर्चा; 11 साल बाद मिली जमानत
हरियाणा के हिसार के सतलोक आश्रम प्रकरण में उम्रकैद की सजा काट रहा रामपाल 11 साल 4 माह बाद आज जेल से बाहर आएगा। हत्या के 2 मामलों में कोर्ट के आदेश के बाद 5-5 लाख रुपए के बेल बॉन्ड जमा कराए गए। कोर्ट में सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जेल से उसकी रिहाई की प्रक्रिया तेज हुई।
दिल्ली नंबर की एक डिफेंडर गाड़ी जेल में पहुंच गई है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि रामपाल कुछ ही देर में जेल से बाहर आएगा। चर्चा है कि रामपाल यहां से सीधे सोनीपत आश्रम जा सकता है। इसे देखते हुए कई नाकों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
बता दें कि, सतलोक आश्रम मामले में लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने रामपाल को दोषी ठहराया था। इस केस में करीब 425 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 58 की गवाही अहम रही। कोर्ट ने सुनवाई के बाद हत्या सहित अन्य धाराओं में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। देशद्रोह से जुड़े मामले में जमानत मिलने के बाद रामपाल की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

2014 में हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान महिलाओं और बच्चों समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी। इसी मामले में रामपाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
सतलोक आश्रम मामले में लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने रामपाल को दोषी ठहराया था। इस केस में करीब 425 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 58 की गवाही अहम रही।
कोर्ट ने सुनवाई के बाद हत्या सहित अन्य धाराओं में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब देशद्रोह के मामले में जमानत मिलने और बेल बॉन्ड जमा होने के बाद उसकी रिहाई संभव हुई।

सतलोक आश्रम प्रकरण में आश्रम प्रमुख रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से 8 अप्रैल बड़ी राहत मिली। करीब 11 साल 4 माह 22 दिन जेल में बंद रहने के बाद रामपाल को अदालत ने नियमित जमानत देने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी पर बेहद गंभीर आरोप हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने अपने समर्थकों को इकट्ठा किया, जिन्होंने पुलिस पर पथराव किया, गोलीबारी की और पेट्रोल बम तक फेंके। कई पुलिसकर्मी घायल हुए। ऐसे में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।
वहीं, रामपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी 11 साल से अधिक समय से जेल में है। मामले में 900 से अधिक आरोपी हैं, जिनमें से अधिकांश को जमानत मिल चुकी है। जिन धाराओं में रामपाल पर आरोप हैं, उन्हीं धाराओं में शामिल कई सह-आरोपियों को भी राहत मिल चुकी है। कुल 425 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल 58 गवाहों की ही गवाही हो पाई है। ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। उम्र करीब 78 वर्ष बताते हुए स्वास्थ्य और मानवीय आधार पर भी जमानत की मांग की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए कहा कि आरोपी लंबे समय से हिरासत में है और ट्रायल की प्रक्रिया काफी धीमी है। अदालत ने यह भी माना कि सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए यह मामला जमानत देने के योग्य बनता है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रामपाल को नियमित जमानत पर रिहा किया जाए। सख्त शर्तें भी लगाई हैं। भविष्य में किसी भी प्रकार की भीड़ इकट्ठा करने या ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार को उसकी जमानत रद्द कराने की पूरी छूट होगी।





