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Sunday, November 30, 2025

जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने पर हरियाणा में जश्न:हिसार में सेशन जज नताशा ने डांस किया; प्रदेश से इस पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पद की शपथ लेते जस्टिस सूर्यकांत और ढोल पर नाचतीं हिसार की सेशन जज नताशा और एडवोकेट्स। - Dainik Bhaskar

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पद की शपथ लेते जस्टिस सूर्यकांत और ढोल पर नाचतीं हिसार की सेशन जज नताशा और एडवोकेट्स।

हरियाणा के हिसार के रहने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। वह हरियाणा के ऐसे पहले व्यक्ति हैं जो CJI बने हैं। सोमवार सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें शपथ दिलाई।

उनकी शपथग्रहण को लेकर हिसार, रोहतक और भिवानी समेत कई जिलों में वकीलों ने खुशी मनाई। हिसार में हवन कराया गया। हिसार और रोहतक के वकीलों ने शपथग्रहण का लाइव टेलीकास्ट देखा।

हिसार में इस दौरान ढोल बजाकर जश्न मनाया गया। जिसमें एडवोकेट्स के साथ हिसार की जिला एवं सेशन जज नताशा ने भी खुशी में डांस किया। वहीं शपथग्रहण में CJI सूर्यकांत का पूरा परिवार शामिल हुआ।

इस मौके तीनों भाई डॉ. शिवकांत, ऋषिकांत और देवकांत के साथ उनका पूरा परिवार भी शामिल हुआ। CJI की बड़ी बहन कमला देवी और सास-ससुर रामप्रताप व आरती देवी भी शपथग्रहण में मौजूद रहीं।

जस्टिस सूर्यकांत की शपथग्रहण से जुड़े PHOTOS…

CJI सूर्यकांत अपनी बहन कमला देवी के पांव छूते हुए। साथ में बड़े भाई ऋषिकांत (टोपी पहने) बैठे हैं।
CJI सूर्यकांत अपनी बहन कमला देवी के पांव छूते हुए। साथ में बड़े भाई ऋषिकांत (टोपी पहने) बैठे हैं।
CJI सूर्यकांत ने अपने ससुर रामप्रताप और सास आरती शर्मा के पांव छुए।
CJI सूर्यकांत ने अपने ससुर रामप्रताप और सास आरती शर्मा के पांव छुए।
CJI सूर्यकांत के हिसार स्थित पेटवाड़ गांव में महिलाओं ने नाचकर खुशी मनाई।
CJI सूर्यकांत के हिसार स्थित पेटवाड़ गांव में महिलाओं ने नाचकर खुशी मनाई।
हिसार बार एसोसिएशन ने जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण से पहले हवन कराया।
हिसार बार एसोसिएशन ने जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण से पहले हवन कराया।

जस्टिस सूर्यकांत CJI बनने से पहले दिवाली पर हिसार में स्थित पैतृक गांव पेटवाड़ आए थे। गांव में वह बिना किसी सूचना के आए और अपने पुश्तैनी मकान में ठहरे थे। उनका पूरा कुनबा आज भी गांव में रहता है। यहां उनके बचपन के दोस्त और चाचा व ताऊ के अलावा उनके बेटे व बहुएं रहती हैं।

हिसार के गांव पेटवाड़ में दिवाली पर अपने घर आए थे जस्टिस सूर्यकांत।
हिसार के गांव पेटवाड़ में दिवाली पर अपने घर आए थे जस्टिस सूर्यकांत।

सूर्यकांत का हिसार से गहरा नाता रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1984-85 में हिसार जिला न्यायालय में ही वकील के रूप में की थी और लगभग 6 माह तक यहां प्रैक्टिस की थी। हिसार के वरिष्ठ वकील स्वर्गीय आत्माराम बंसल के यहां उन्होंने जूनियर के तौर पर काम किया था।

हिसार बार एसोसिएशन के सदस्यों को शपथ ग्रहण का विशेष निमंत्रण दिया गया।
हिसार बार एसोसिएशन के सदस्यों को शपथ ग्रहण का विशेष निमंत्रण दिया गया।

भाई ऋषिकांत ने बताया कि परिवार में सब टीचर थे, मगर सूर्यकांत ने सबसे अलग जाकर कानून की पढ़ाई की। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से और ग्रेजुएशन हिसार के सरकारी कॉलेज से पूरी की।

वह गांव के स्कूल में जमीन पर बैठकर पढ़ते थे। शुरू से ही वह बोलने में तेज थे और हाजिर जवाब थे। ग्रेजुएशन के दौरान सूर्यकांत ने एक कविता लिखी थी “मेढ़ पर मिट्‌टी चढ़ा दो”, जो उस समय यूथ में काफी पॉपुलर हुई थी।

सूर्यकांत के बड़े भाई शिवकांत ने बताया कि सूर्यकांत सादा खाना पसंद करता है। घर में कुछ भी बना हो, वह खा लेता है। जज बनने के बाद घर पर आना हुआ। हालांकि, हम उसकी पसंद का ध्यान रखते हैं। उनको मिसी रोटी, बाजरे की रोटी, लहसुन की चटनी, लस्सी और मूंग की दाल पसंद है।

इस तस्वीर में जस्टिस सूर्यकांत अपनी पत्नी सविता के साथ हैं। सविता इंग्लिश की प्रोफेसर रही हैं।
इस तस्वीर में जस्टिस सूर्यकांत अपनी पत्नी सविता के साथ हैं। सविता इंग्लिश की प्रोफेसर रही हैं।

ऋषिकांत ने बताया कि सूर्यकांत और उनके बड़े भाई देवकांत ने एक साथ 10वीं की पढ़ाई की। एक बार देवकांत की बाजू में फ्रैक्चर हो गया था, इसलिए पिता ने बड़े भाई का एक साल ड्रॉप कर दिया और सूर्यकांत के साथ 10वीं की पढ़ाई करवाई। 10वीं की पढ़ाई के बाद सूर्यकांत ताऊ के साथ खेतों में काम करने जाया करते थे।

बड़े भाई ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत की पत्नी सविता सूर्यकांत हैं और वह कॉलेज में प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुई हैं। वह इंग्लिश की प्रोफेसर रही हैं। वह प्रमोशन के बाद कॉलेज प्रिंसिपल रिटायर्ड हुईं। उनकी 2 बेटियां हैं- मुग्धा और कनुप्रिया। दोनों बेटियां पढ़ाई कर रही हैं।

भाई ने बताया कि सूर्यकांत गांव के प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित करते हैं। परिवार का पंडित राम प्रसाद आत्माराम धर्मार्थ न्यास नाम से NGO है। इस NGO में किसी से चंदा नहीं लेते। 10वीं और 12वीं के टॉपरों को सूर्यकांत हर साल सम्मानित करते हैं।

ऋषिकांत ने बताया कि पिता मदन गोपाल संस्कृत के टीचर और अच्छे साहित्यकार थे। उन्होंने हरियाणवी में रामायण लिखी थी, जिसके लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी से सूरदास पुरस्कार मिला था। इसके साथ-साथ उन्होंने 14 पुस्तकें लिखी थीं। उन्हें पंडित लख्मीचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

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