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Sunday, March 22, 2026

राजकीय सम्मान से शहीद मोहित का अंतिम संस्कार:झज्जर में छोटे भाई ने मुखाग्नि दी, तिरंगा लेकर पिता भावुक हुए; प्रेग्नेंट पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

हरियाणा में झज्जर के शहीद जवान मोहित चौहान का उनके पैतृक गांव गिजाड़ोध में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कैप्टन सौरभ कुमार के नेतृत्व में सेना के जवानों ने गन फायर कर उन्हें अंतिम सलामी दी।

छोटे भाई जितेंद्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान सेना के अधिकारियों ने पिता सतपाल को तिरंगा सौंपा। बेटे को अंतिम विदाई देते हुए वे भावुक हो गए। वहीं, उनकी गर्भवती पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मोहित को याद कर वे कई बार चक्कर खाकर गिर गईं। परिवार की महिलाओं ने उन्हें संभाला।

इससे पहले, सेना की गाड़ी उनका पार्थिव शरीर लेकर झज्जर पहुंची। रास्ते में स्थानीय लोगों ने ट्रक पर पुष्पवर्षा कर शहीद को सलामी दी। शहर से गांव तक युवाओं ने आर्मी के ट्रक के पीछे बाइक रैली निकाली। सभी मोहित के हौसले और सेना में जाने के उनके फैसले की बातें करते रहे।

जम्मू कश्मीर के डोडा में 22 जनवरी को सेना की गाड़ी 400 फीट गहरी खाई में गिर गई थी। इस हादसे में मोहित के साथ 10 जवान शहीद हुए थे। मोहित 5 साल पहले आर्मी में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। करीब एक साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। उनकी पत्नी अंजलि करीब ढाई महीने की गर्भवती हैं।

अंजलि ने भावुक होते हुए आर्मी के अधिकारियों से कहा…

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मैंने मोहित को ऐसा नहीं भेजा था, सही सलामत भेजा था। पिछली बार ड्यूटी पर जाते समय वापस लौटने का वादा करके गए थे। मुझे भी साथ ले जाने वाले थे।

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शहीद मोहित की अंतिम विदाई के PHOTOS…

शहीद मोहित की पत्नी उनका पार्थिव शरीर देखते ही भावुक होकर रोने लगी।
शहीद मोहित की पत्नी उनका पार्थिव शरीर देखते ही भावुक होकर रोने लगी।
भाई जितेंद्र ने शहीद मोहित को मुखाग्नि दी।
भाई जितेंद्र ने शहीद मोहित को मुखाग्नि दी।
शहीद मोहित के पिता को तिरंगा सौंपते सेना के अधिकारी।
शहीद मोहित के पिता को तिरंगा सौंपते सेना के अधिकारी।
गांव पहुंचा शहीद मोहित चौहान का पार्थिव शरीर।
गांव पहुंचा शहीद मोहित चौहान का पार्थिव शरीर।
हाथों में तिरंगा लेकर शहीद जवान के सम्मान में रैली निकालते युवा।

गिजाड़ोध गांव के सरपंच नरेश ने बताया कि मोहित दो भाइयों में बड़े थे। उनका छोटा भाई जितेंद्र है, जो गांव में गाड़ी चलाता है। मोहित के पिता सतपाल खेतीबाड़ी करते हैं। मोहित के परिवार में और कोई सेना में नहीं है। वे अपनी मेहनत की बदौलत सेना में भर्ती हुए।

सरपंच ने आगे बताया कि मोहित के शहीद होने की खबर गांव में फैलते ही लोगों के बीच उनकी चर्चा होने लगी। लोग उनके देश के प्रति सेवा भाव और सेना में जाकर देश सेवा करने के किस्से आपस में सुनाने लगे। मोहित में सेना के प्रति भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी।

सरपंच नरेश कुमार ने बताया कि मोहित पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे। सेना की तैयारी के लिए वे गांव की सड़कों पर दौड़ लगाते थे। उन्होंने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में की थी। उन्हें रोजाना गांव से 4 किलोमीटर दूर सिलानी गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने जाना होता था। एक साल पहले मोहित की शादी हुई थी। उसकी पत्नी ढाई महीने की प्रेग्नेंट है। लगभग दो साल पहले ही उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई थी।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

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