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Tuesday, March 17, 2026

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस-भाजपा को एक-एक सीट:कांग्रेस के 5 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की; एक वोट से भी कम के अंतर से जीते बौद्ध

संजय भाटिया को पहली प्राथमिकता के 27.66 वोट मिले। निर्दलीय नांदल को 27.34 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध को 28 वोट मिले। इस प्रकार, नांदल, बौद्ध से केवल 0.66 वोट, यानी एक वोट से भी कम अंतर से हार गए।

जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने कहा-

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इस चुनाव में हमारे सामने चुनौती बहुत बड़ी थी। हमने अग्नि परीक्षा पास की है। जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की है, उन्हें जनता देख लेगी।

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इस चुनाव के बाद हरियाणा से राज्यसभा की पांच सीटों में से चार भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में हो गई है। भाजपा के 3 सांसद संजय भाटिया, रेखा शर्मा और सुभाष बराला है, जबकि कार्तिकेय शर्मा समर्थित है। वहीं, अब कांग्रेस के भी हरियाणा से एक सांसद कर्मवीर बौद्ध हो गए है।

जीत के बाद विक्ट्री का साइन बनाते कर्मवीर बौद्ध, भूपेंद्र सिंह हुड़्डा और अन्य कांग्रेसी नेता।
जीत के बाद विक्ट्री का साइन बनाते कर्मवीर बौद्ध, भूपेंद्र सिंह हुड़्डा और अन्य कांग्रेसी नेता।

कुल 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से 2 ने वोट नहीं डाला और 5 वोट रद्द हो गए। इस प्रकार, कुल 83 वोट बचे। भाजपा के 48 विधायकों में से 1 का वोट रद्द हो गया, जिससे 47 वोट बचे। पहली प्राथमिकता वाले वोट भाटिया को 39 और नांदल को 8 मिले। कांग्रेस के 37 विधायकों में से 4 वोट रद्द हो गए और 5 ने क्रॉस वोटिंग की, जिससे 28 वोट बचे। इससे कर्मवीर बौद्ध की जीत तय हो गई।

भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को पहली प्राथमिकता के 16 वोट मिले, जिनमें भाजपा के 8, कांग्रेस के 5 और निर्दलीय के 3 वोट शामिल हैं। 83 वैध वोट पड़े हैं। वोट वैल्यू का फार्मूला है कि कुल वैध वोट को (सीटों की संख्या + 1) से भाग दें। फिर जो संख्या आए उसमें 1 जोड़ दें। यही जीत का आंकड़ा (कोटा) होता है।

इसके हिसाब (वैध वोट 83/2+1=27.66) से भाजपा के संजय की पहली प्राथमिकता वाले 27.66 वोट से जीत हुई। पहली प्राथमिकता के बचे 11.34 वोट दूसरी प्राथमिकता वाले प्रत्याशी को शिफ्ट हुए। यानी नांदल को 27.34 वोट मिले, और वे भाजपा का एक वोट रद्द होने के कारण कांग्रेस के बौद्ध (28 वोट) से 0.66 वोट से पीछे रह गए।

सवाल: इनेलो के 2 वोट डलते तो कैसे बदलता नतीजा?

जवाब: यदि इनेलो ने राज्यसभा चुनाव से दूरी न बनाई होती तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। कांग्रेस की जीत .33 वोट वैल्यू यानी एक से भी कम वोट के अंतर से हुई। इनेलो निर्दलीय नांदल को वोट देती तो उनकी जीत तय थी।

सवाल: भाजपा की एक वोट रद्द होने से कैसे गड़बड़ हो गई?

जवाब: यदि भाजपा का एक वोट रद्द न हुआ होता, तब भी नतीजे बदल जाते। क्योंकि उस स्थिति में सतीश नांदल के पास कांग्रेस से अधिक वोट वैल्यू होती।

सवाल: भरत सिंह बेनीवाल का वोट रद्द होता तब क्या होता?

जवाब: वोट सीक्रेसी को लेकर कांग्रेस विधायक भरत सिंह बेनीवाल के वोट की शिकायत हुई थी। हालांकि जांच में वह वोट वैलिड निकला। अगर यह वोट रद्द हो जाता तो कांग्रेस ये चुनाव हार सकती थी।

सवाल: 9 वोट गंवाने के बावजूद कांग्रेस कैसी जीत गई?

जवाब: इनेलो के 2 वोट न डलने और 5 वोट रद्द होने से कुल 83 वोटों की गिनती हुई। ऐसे में जीत का कोटा 27.66 वोट रह गया। इसलिए कांग्रेस 5 क्रॉस वोट और 4 वोट रद्द होने के बाद भी जीत गई। क्योंकि उसके पास 28 वोट बच गई।

सवाल: पिछली बार के मुकाबले इस बार कांग्रेस में अलग क्या था?

जवाब: इस बार कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। जीत के कोटा वोट पहले से अधिक थे। 2022 में पार्टी के पास 31 विधायक ही थे। 2 वोट में ही खेल हो गया था।

सवाल: कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक क्या रहे?

जवाब: राहुल गांधी ने गुटबाजी को देखते हुए अपनी पसंद का प्रत्याशी बनवाया। जिनके ऊपर किसी गुट की छाप नहीं थी। अनुसूचित समाज से प्रत्याशी बनाकर अपने कोर वोटबैंक को साधने की कोशिश की। 3 दिन की बाड़ाबंदी का फायदा मिला।

सवाल: कांग्रेस के भीतर क्या असर होगा?

जवाब: नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कद बढ़ेगा। पहले दिन से हुड्डा ने ही विधायकों को संभालने की कमान थामी। हुड्डा खुद चंडीगढ़ में रहे, जबकि सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा को विधायकों के साथ हिमाचल भेजा। हालांकि 5 क्रॉस वोट पर हाईकमान को जवाब देना होगा।

सवाल: कांग्रेस का क्या मैसेज देने का प्रयास?

जवाब: कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए एससी समाज से प्रत्याशी बनाया। लोकसभा में भी दो एससी आरक्षित सीटें सिरसा और अंबाला कांग्रेस के खाते में हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 5 सीटें दिलाने में इस वोट बैंक की अहम भूमिका रही। विधानसभा चुनाव में सैलजा की नाराजगी के बाद वोट बैंक छिटका था।

सवाल: भाजपा कहां चूक गई?

जवाब: भाजपा ने शुरू में ही आक्रामक रणनीति अपनाकर कांग्रेस को बैकफुट पर धकेला। पार्टी के उपाध्यक्ष सतीश नांदल को निर्दलीय उतार 2016 और 2022 वाला फॉर्मूला अपनाया। गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी को पर्यवेक्षक बनाया। हालांकि, जीत के लिए जरूरी वोट नहीं जुटा पाई। भाजपा का एक वोट रद्द होना भी कांग्रेस के पक्ष में गया।

सवाल: इनेलो वोटिंग से दूर क्यों हुई?

जवाब: असल में इनेलो फंस गई थी। वोटिंग में शामिल होने पर हॉर्स ट्रेडिंग का भागीदारी बनने का आरोप लगता। कांग्रेस प्रचारित करती कि BJP की बी टीम है। परंपरागत प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से हाथ मिलाने से नुकसान का खतरा था। जाट वोट बैंक की नाराजगी भी झेलनी पड़ सकती थी।

जीत का प्रमाण पत्र लेकर आते कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध
जीत का प्रमाण पत्र लेकर आते कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध

काउंटिंग शुरू होने से पहले 3 आपत्ति: काउंटिंग शाम 5 बजे शुरू होनी थी। इससे पहले ही राज्यमंत्री गौरव गौतम ने टोहाना से कांग्रेस विधायक परमवीर सिंह और मंत्री कृष्ण बेदी ने ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बेनीवाल के वोट की सीक्रेसी लीक करने की शिकायत की। वहीं, कांग्रेस विधायक भारत भूषण बत्रा ने मंत्री अनिल विज के खिलाफ भी यही शिकायत दर्ज कराई। इस पर काफी विवाद हुआ, जिसके कारण 5 बजे गिनती शुरू नहीं हो पाई।

परमवीर सिंह का वोट रद्द हुआ: मामला केंद्रीय चुनाव आयोग तक पहुंचा। जांच में परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया गया, जबकि भरत सिंह बेनीवाल और अनिल विज का वोट वैध माना गया। इसके बाद रात 10:25 बजे गिनती की प्रक्रिया शुरू हुई। स्क्रीनिंग के दौरान भी कैंसिल वोटों पर विवाद हुआ। काउंटिंग शुरू हुई तो कांग्रेस के 5 विधायकों की क्रॉस वोटिंग सामने आई। साथ ही इनके 4 वोट भी रद्द हुए। भाजपा का भी एक वोट रद्द हुआ। इसके बाद रात 1:10 बजे रिजल्ट घोषित किया गया।

कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत के बाद विक्ट्री साइन बनाते नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा और अन्य कांग्रेसी नेता।
कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत के बाद विक्ट्री साइन बनाते नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा और अन्य कांग्रेसी नेता।

कांग्रेस की जीत ऐसी, जश्न से ज्यादा जवाब देने की चुनौती

कांग्रेस राज्यसभा चुनाव जीत गई, लेकिन 9 वोट गंवाने का बड़ा झटका भी झेलना पड़ा। कांग्रेस के 5 वोट निर्दलीय के साथ गए। इसके लिए कांग्रेस नेताओं को हाईकमान को भी जवाब देना होगा। जनता के बीच जाकर भी जवाब देना होगा। रिजल्ट आने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कांग्रेस के 25 प्रतिशत विधायक ट्रांसफर हुए हैं।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

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