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Tuesday, March 24, 2026

BREAKING: डेरा प्रमुख राम रहीम 15वीं बार जेल से बाहर, 40 दिन की पैरोल पर सिरसा रवाना


रोहतक की सुनारिया जेल में साध्वियों के यौन उत्पीड़न और पत्रकार हत्या मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। इस बार उसे 40 दिन की पैरोल मिली है। सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे पैरोल मिलने के बाद वह काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ।

सुनारिया जेल से राम रहीम को लेने के लिए सिरसा डेरे से लग्जरी गाड़ियों का काफिला पहुंचा, जिसमें दो बुलेटप्रूफ लैंड क्रूजर, दो फॉर्च्यूनर और दो अन्य वाहन शामिल थे। यह 15वीं बार है जब राम रहीम पैरोल या फरलो लेकर जेल से बाहर आया है। इससे पहले 15 अगस्त को भी वह जन्मदिन मनाने के लिए जेल से बाहर आया था।

जानकारी के मुताबिक, इस बार राम रहीम उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित बरनावा आश्रम नहीं जाएगा, बल्कि सिरसा डेरे में ही रहेगा। सुरक्षा को देखते हुए डेरे और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है।

25 अगस्त 2017 को दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा हुई। वहीं, डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्या मामले में अक्टूबर 2021 में CBI कोर्ट ने भी उसे उम्रकैद की सजा दी थी।

हालांकि, इस केस में सजा मिलने के करीब 3 साल बाद हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया। फिलहाल वह रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है और यहां से अब तक 14 बार पैरोल या फरलो लेकर बाहर आ चुका है। यह 15वां मौका है।

इससे पहले अप्रैल में उसे 21 दिन की पैरोल मिली थी। जनवरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव से एक हफ्ते पहले 30 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया था। उस दौरान वह सिरसा स्थित डेरा हेडक्वार्टर में ही रहा था। पहले भी जेल से बाहर आने पर वह उत्तर प्रदेश के बागपत आश्रम में ठहर चुका है।

पैरोल के दौरान राम रहीम अपने फॉलोअर्स को वीडियो मैसेज जारी करता रहा है। नियमों के तहत उसे फॉलोअर्स को एकत्र करने की अनुमति नहीं होती, लेकिन वर्चुअल माध्यम से संवाद करने की छूट दी जाती है।

पैरोल
अगर कैदी अपनी सजा का एक निश्चित हिस्सा पूरा कर लेता है, तो विशेष परिस्थितियों में उसे पैरोल दी जाती है। जैसे परिवार में मृत्यु, गंभीर बीमारी, शादी या अन्य जरूरी कारण। पैरोल दो तरह की होती है—रेगुलर और कस्टडी। रेगुलर पैरोल में कैदी स्वतंत्र रहता है, जबकि कस्टडी पैरोल में पुलिस निगरानी रहती है।

फरलो
फरलो कैदी का कानूनी अधिकार माना जाता है। इसके लिए किसी विशेष कारण की आवश्यकता नहीं होती। हर राज्य के फरलो को लेकर अपने अलग नियम और गाइडलाइंस होती हैं, हालांकि प्रक्रिया राज्यों में अलग-अलग हो सकती है।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

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