नारनौल के शहीद सूबेदार की सैन्य सम्मान के साथ विदाई:मुख्याग्नि देकर बेटा बेला- मैं भी सेना में जाउंगा; जम्मू-कश्मीर में पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हुए
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल का एक और वीर सपूत ने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया है। भारतीय सेना की आतंकवाद विरोधी विशेष इकाई राष्ट्रीय राइफल्स (RR) में तैनात सूबेदार हीरालाल उत्तरी कश्मीर के बारामुला सेक्टर में पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हो गए।
तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव अकबरपुर पहुंचा। कुछ देर के लिए उनके शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद पार्थिव शरीर को वहां से श्मशान घाट ले जाया गया। जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी गई। बेटे गजेंद्र ने मुखाग्नि दी। बेटे ने कहा कि उन्हें पिता की शहादत पर गर्व है। वह भी सेना में जाकर देश की सेवा करेगा।
अंतिम संस्कार में नांगल चौधरी से विधायक मंजू चौधरी, नांगल चौधरी पंचायत समिति अध्यक्ष कर्मपाल, DSP सुरेश कुमार, SHO भगत सिंह, पूर्व चेयरमैन प्रवीण चौधरी, विकास यादव बड़कोदा, विनोद यादव भील, प्रमोद ताखर और बलदेव सिंह चहल सहित अनेक लोग थे।
शहीद के घर की PHOTOS…







जानकारी के अनुसार, सूबेदार हीरालाल 9 जनवरी को अपने साथियों के साथ एक बेहद संवेदनशील और दुर्गम पहाड़ी इलाके में नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) पर थे। बर्फ जमे और फिसलन भरे संकरे रास्ते पर अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण वह खाई में जा गिरे। इस हादसे में उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर के निवासी हीरालाल का जन्म 27 अप्रैल 1981 को हुआ था। वह 30 जनवरी 2000 को भारतीय सेना में भर्ती हुए। करीब 23 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने जम्मू कश्मीर सहित कई कठिन क्षेत्रों में ड्यूटी निभाई और 23 मई 2023 को सूबेदार के पद पर पदोन्नत हुए।
सूबेदार हीरालाल के 88 वर्षीय पिता हरिराम गांव में रहते हैं और अक्सर अस्वस्थ रहते हैं। वह हार्ट के मरीज हैं। बेटे की शहादत की खबर से परिवार में शोक का माहौल है। शहीद की पत्नी रोशनी देवी गृहिणी हैं। बेटा गजेंद्र आइआइटी पुणे में पढ़ाई कर रहा है और बेटी स्नेहलता दिल्ली में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। परिजन का कहना है कि परिवार के लिए हीरालाल ही हर भरोसे और हर हिम्मत का आधार थे।
सूबेदार हीरालाल के पार्थिव देह के गांव पहुंचने से पहले ही अकबरपुर में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने तय किया है कि वीर सपूत को अंतिम विदाई तिरंगा यात्रा के साथ दी जाएगी। गांव की गलियों से होकर जब तिरंगे में लिपटा उनका शरीर गुजरेगा तो हर घर से श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। स्थानीय लोग, पूर्व सैनिक और जनप्रतिनिधि भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।
अकबरपुर गांव में सैन्य सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा। सेना की टुकड़ी उन्हें अंतिम सलामी देगी और गांव के लोग अपने वीर सपूत को विदा करेंगे। ग्रामीणों ने कहा- अकबरपुर के लिए यह गर्व और गम दोनों का पल होगा, जब एक बेटा देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर अमर हो गया।





