हनीमून के दूसरे दिन हरियाणा के लेफ्टिनेंट को आतंकियों ने गोली मारी ?

यूरोप वीजा न लगा तो पहलगाम गए विनय-हिमांशी: हनीमून के दूसरे दिन हरियाणा के लेफ्टिनेंट को आतंकियों ने गोली मारी; 8 दिन बाद बर्थडे होता
The Airnews | करनाल | रिपोर्टर: यश
हरियाणा के करनाल जिले से संबंध रखने वाले नेवी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की हाल ही में आतंकियों द्वारा जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हत्या कर दी गई। यह घटना न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राज्य और राष्ट्र के लिए एक भावनात्मक झटका है। यह कहानी एक युवा अधिकारी की है जो देश की सेवा में समर्पित था, और जो अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर ही रहा था कि आतंकवाद की काली छाया ने उसे निगल लिया।
शादी से शोक तक: 7 दिनों की कहानी
विनय नरवाल और गुरुग्राम की हिमांशी की शादी 16 अप्रैल को मसूरी में एक डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में संपन्न हुई थी। इसके बाद 19 अप्रैल को करनाल में रिसेप्शन हुआ। नवविवाहित जोड़ा यूरोप में हनीमून मनाने की योजना बना चुका था, मगर ऐन वक्त पर वीजा नहीं लग पाने के कारण उन्हें अपनी योजना बदलनी पड़ी और उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम को हनीमून डेस्टिनेशन के रूप में चुना।
आतंकी हमला: शादी के आठवें दिन ही मौत
22 अप्रैल को, जब वे पहलगाम में थे, तभी आतंकी हमले में लेफ्टिनेंट विनय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी पत्नी हिमांशी ने बताया कि एक अजनबी ने उनके पति का नाम पूछा और यह कहते हुए गोली मार दी कि “ये मुस्लिम नहीं है।” इस हमले की पुष्टि के साथ ही पूरा परिवार, मोहल्ला और समाज स्तब्ध रह गया।
करनाल का वीर बेटा
लेफ्टिनेंट विनय नरवाल मूल रूप से करनाल जिले के भुसली गांव के रहने वाले थे और पिछले 15 वर्षों से उनका परिवार सेक्टर-7 में रह रहा है। विनय की पढ़ाई करनाल के संत कबीर स्कूल से हुई और उसके बाद दिल्ली से उन्होंने बीटेक किया। वे पढ़ाई में अव्वल रहे और हमेशा से सेना में जाने का सपना देखा।
सेना से गहरा नाता
उनके दादा हवा सिंह BSF और हरियाणा पुलिस दोनों से सेवा निवृत्त हो चुके हैं। परिवार की पीढ़ियों से सेना में सेवा करने की परंपरा रही है। विनय के ताऊ, नाना के भाई और अन्य रिश्तेदार भी आर्मी से जुड़े रहे हैं। खुद विनय ने CDS की परीक्षा दी थी, जिसमें उनका चयन नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने SSB की तैयारी की और 3 साल पहले भारतीय नौसेना में अधिकारी के रूप में चुने गए। उनकी पोस्टिंग केरल के कोच्चि में थी।
विनय की शादी और पारिवारिक सपने
विनय की हिमांशी से शादी का रिश्ता दो महीने पहले तय हुआ था। हिमांशी PHD कर रही हैं और बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाती हैं। उनके पिता गुरुग्राम में ETO के पद पर कार्यरत हैं। शादी के बाद परिवार में उल्लास का माहौल था। सभी को उम्मीद थी कि अब घर में एक नई शुरुआत होगी।
वीजा न लगना बना जीवन का सबसे बड़ा मोड़
शादी के बाद विनय-हिमांशी का हनीमून यूरोप में प्लान किया गया था, मगर वीजा में दिक्कत आने से उन्हें कश्मीर जाना पड़ा। 21 अप्रैल को वे पहलगाम पहुंचे और 22 अप्रैल को होटल से बाहर टहलने निकले। वहीं पर यह आतंकी हमला हुआ जिसमें विनय की जान चली गई।
विनय का बर्थडे, जो अब रह गया अधूरा
1 मई को विनय का जन्मदिन था, जिसे लेकर परिवार ने विशेष आयोजन की तैयारी की थी। मगर, अब परिवार उसी दिन अंतिम संस्कार की तैयारी में है। एक बर्थडे पार्टी की जगह अब शोक सभा होगी। 3 मई को विनय को अपनी पत्नी हिमांशी के साथ ड्यूटी पर वापस लौटना था।
हिमांशी की गवाही: सबसे भावुक पल
एक वायरल वीडियो में हिमांशी फूट-फूटकर रोते हुए कहती हैं, “हम भेलपुरी खा रहे थे, तभी एक आदमी आया और बोला कि ये मुस्लिम नहीं है और गोली चला दी। मैं चिल्लाई लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।” यह बयान केवल एक पत्नी का नहीं, बल्कि उस स्त्री का है जिसने अभी-अभी अपने जीवन साथी को खोया है।
दादा की दर्दभरी बात: “काश, वीजा लग गया होता”
दादा हवा सिंह ने रुंधे गले से कहा, “काश, उनका यूरोप का वीजा लग जाता तो पोता विनय आज हमारे बीच होता।” उन्होंने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर जाते समय विनय और हिमांशी ने कहा था- “दादा जी ज्यादा मीठा मत खाना।” ये उनकी आखिरी बात थी जो दादा को हमेशा याद रहेगी।
सेना और सरकार से अपील
परिवार और समाज ने सरकार से इस आतंकी हमले की सख्त निंदा करते हुए दोषियों को पकड़ने की मांग की है। साथ ही, इस प्रकार के क्षेत्रों में टूरिज्म की सुरक्षा बढ़ाने की भी आवश्यकता बताई गई है।
विनय के जाने से अधूरा रह गया सपना
विनय ने जिस जुनून और लगन से देश सेवा के लिए कदम बढ़ाया था, वह अब अधूरा रह गया। उनकी पत्नी हिमांशी, जो अभी नवविवाहिता ही थीं, अब एक वीर पत्नी का जीवन जीने को विवश हैं। उनके परिवार ने न केवल एक बेटे को खोया है, बल्कि एक सपने को भी खो दिया है।




