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Tuesday, March 24, 2026

हरियाणा सरकार गिराएगी फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी के 8 हजार घर: 9 दिन में खाली करने का अल्टीमेटम, लोग बोले– 50 साल से रह रहे, अब कहां जाएं?

आधार कार्ड और हाउस टैक्स की रसीद दिखाते कॉलोनीवासी।                                    पुनर्वास विभाग के तहसीलदार विजय सिंह की तरफ से जारी किया गया नोटिस।

फरीदाबाद, 1 जुलाई, Sahil Kasoon The Airnews — हरियाणा के फरीदाबाद में सरकार ने एलिवेटेड फ्लाईओवर प्रोजेक्ट के तहत नेहरू कॉलोनी के करीब 8,000 मकानों को गिराने का फैसला लिया है। पुनर्वास विभाग की ओर से 26 जून को जारी नोटिस के अनुसार लोगों को 10 जुलाई तक मकान खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। इसके बाद प्रशासन खुद से कब्जा हटाएगा।

नेहरू कॉलोनी के लोग सदमे में हैं। वे कहते हैं कि यहां वे पिछले 40-50 सालों से रह रहे हैं, उनके पास बिजली-पानी कनेक्शन, आधार कार्ड, वोटर ID, हाउस टैक्स की रसीदें हैं — फिर उन्हें कैसे अवैध घोषित किया जा सकता है?


सरकार का पक्ष: जमीन पर अवैध कब्जा, एलिवेटेड फ्लाईओवर ज़रूरी

सरकार का कहना है कि यह 60 एकड़ जमीन पुनर्वास विभाग की है, जिस पर अवैध कब्जा कर मकान बनाए गए हैं। मेट्रो चौक से सैनिक कॉलोनी मोड़ तक एलिवेटेड फ्लाईओवर बनाया जा रहा है जिससे जाम की समस्या खत्म होगी और गुरुग्राम की ओर जाने वाले लोग सीधे इस रूट से जा सकेंगे। इसलिए जमीन को खाली कराना ज़रूरी है।

पुनर्वास विभाग के तहसीलदार विजय सिंह ने कहा कि उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी है, और अभी तोड़फोड़ नहीं की जा रही है, लेकिन चेतावनी दी जा चुकी है।


जनता का पक्ष: 50 साल से रह रहे, अब मकान अवैध कैसे?

स्थानीय निवासी सुशील कुमार ने बताया कि उनका परिवार पिछले 50 वर्षों से यहां रह रहा है। सरकार ने उन्हें बिजली, पानी, राशन कार्ड और टैक्स बिल जैसी सभी सुविधाएं दी हैं। उन्होंने सवाल उठाया — अगर उनका घर अवैध था तो प्रशासन ने ये सारी सेवाएं क्यों दीं?

60 वर्षीय सुमित्रा देवी रो पड़ीं — “बिना छत के कहां जाएंगे? बच्चों की शादियां भी यहीं हुई हैं। अब तो नोटिस भी मिल गया, कुछ समझ नहीं आ रहा।”

राम सिंह का कहना है कि अगर सरकार उन्हें कोई दूसरा रहने का स्थान दे, तभी वे मकान छोड़ेंगे।

ज्ञान सिंह ने दस्तावेज दिखाए — 1977 का वोटर कार्ड, हाउस टैक्स की रसीदें, आधार, बिजली बिल — सभी में यही पता है। वे बोले, “अगर सब कुछ सरकारी रिकॉर्ड में है, तो अब यह अवैध कैसे हो गया?”


स्थानीय विधायक का समर्थन

विधायक धनेश अदलखा ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए कहा, “मैं किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने दूंगा। सरकार जनता के साथ है।”

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