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अनिल विज X से मिनिस्टर हटाने पर सामने आए:बोले- मैं नहीं चाहता कोई पद की वजह से मेरे साथ जुड़े; सरकार से नाराजगी पर भी जवाब दिया

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर नाम के आगे से मिनिस्टर शब्द हटाने पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि मैं नहीं चाहता कि कोई पद की वजह से मेरे साथ जुड़े। अगर कोई मेरा फालोअर्स बनना चाहता है तो अनिल विज की वजह से बने।

अनिल विज ने सरकार से किसी तरह की नाराजगी से भी इनकार किया। हालांकि कुछ दिन पहले अंबाला कैंट में पैरलल भाजपा चलाने वालों के बारे में उन्होंने फिर कोई जवाब नहीं दिया। अनिल विज के इस कदम से संकेत मिल रहे हैं कि अब वे पद के बजाय व्यक्तिगत तौर पर खुद को अंबाला कैंट में मजबूत रखने की कोशिश कर रहे हैं।

यह स्क्रीनशॉट मंत्री की X प्रोफाइल से लिया गया है। जानकारी के अनुसार,अनिल विज ने बुधवार रात करीब साढ़े 11 बजे अपने सोशल मीडिया अकाउंट में यह बदलाव किया। पहले विज ने X पर अपने नाम के साथ मिनिस्टर हरियाणा, इंडिया लिखा हुआ था।
यह स्क्रीनशॉट मंत्री की X प्रोफाइल से लिया गया है। जानकारी के अनुसार,अनिल विज ने बुधवार रात करीब साढ़े 11 बजे अपने सोशल मीडिया अकाउंट में यह बदलाव किया। पहले विज ने X पर अपने नाम के साथ मिनिस्टर हरियाणा, इंडिया लिखा हुआ था।

1.सवाल: सोशल मीडिया अकाउंट से आपके मिनिस्टर शब्द हट गया, इसका क्या कारण रहा?

अनिल विज: बहुत साधारण सी बात है, मैं अपनी व्यूअरशिप और फॉलोअर्स अनिल विज के तौर पर बनाना चाहता हूं, जो मैं कंटेंट डालता हूं, उसके आधार पर बनाना चाहता हूं। इसीलिए मैंने पद हटाए हैं, इसका कोई और मतलब नहीं है। मैं चाहता हूं कि जो भी मेरा फॉलोअर बनना चाहता है, वह अनिल विज के कारण हो।

2. सवाल: 2 दिन पहले आपने कहा था कि अंबाला कैंट में पैरलल भाजपा चलाई जा रही है, इसे उससे जोड़कर देखा जा रहा है।

अनिल विज: उससे या किसी बात से इसे जोड़कर नहीं देखना चाहिए। मैं एज ए अनिल विज ही रहना चाहता हूं। मैं तब से ट्विटर चला रहा हूं, जब से मेरे पास कोई पद नहीं था। मैं इसे बिना पद के नाम से चलाना चाहता हूं। वही साथी मेरे साथ जुड़ें, जो अनिल विज से जुड़ना चाहता हैं या जो मैं कंटेंट डालता हूं, उसके साथ जुड़ें।

3. सवाल: अंबाला कैंट में कौन लोग हैं जो पैरलल भाजपा चला रहे हैं?

अनिल विज: मुझे नहीं पता।

4. सवाल: सरकार से आपकी कोई नाराजगी है?

अनिल विज: कोई नाराजगी नहीं, नाराजगी वाला तो मेरा (सिर की तरफ इशारा करते हुए) खत्म हो गया है।

5. सवाल: रूटीन कामकाज क्या चलते रहेंगे?

अनिल विज: ये ऐसे ही चलते रहेंगे।

अनिल विज ने 12 सितंबर को ही अपने X अकाउंट पर अंबाला में समानांतर भाजपा चलाने वाली टिप्पणी की। अनिल विज ने लिखा था- अंबाला छावनी में कुछ लोग समानांतर भाजपा चला रहे हैं, जिन्हें ऊपर वालों का आशीर्वाद भी प्राप्त है। कमेंट बॉक्स में लिखें कि हम क्या करें? पार्टी का बहुत नुकसान हो रहा है। हालांकि इसके बाद जब वे मीडिया के सामने आए थे तो उन्होंने 4 बार पूछे जाने के बावजूद हर बार नेक्स्ट क्वेश्चन कहकर टाल दिया था।

 सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से विज की सरकार से नाराजगी बढ़ी है। इसकी ताजा वजह भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष आशीष तायल की सीएम नायब सैनी से मुलाकात मानी जा रही है। 11 सितंबर को आशीष तायल अंबाला कैंट के इंडस्ट्रियल एरिया के उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर चंडीगढ़ में सीएम नायब सैनी से मिले थे। तायल ने मुलाकात के फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर किए थे

तायल वही पूर्व भाजपाई हैं, जिनकी विज ने सीएम नायब सैनी के साथ फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर गद्दार का ठप्पा लगाया था। इस ताजा विवाद पर आशीष तायल ने कहा था- मैं तो सिर्फ एक उद्योगपतियों के डेलीगेशन के साथ सीएम से मुलाकात करने चंडीगढ़ गया था। अंबाला छावनी के इंडस्ट्रियल एरिया में पानी की निकासी और आगे पानी न आए, इसे लेकर हमने सीएम को ज्ञापन दिया है। मुझे इस बारे में जानकारी नहीं कि विज की पोस्ट का इशारा किसकी ओर है।

आशीष तायल (पीली शर्ट) ने इंडस्ट्रियल एरिया के उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी।
आशीष तायल (पीली शर्ट) ने इंडस्ट्रियल एरिया के उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी।

सीएम और प्रदेशाध्यक्ष के खिलाफ टिप्पणी पर BJP ने शोकॉज नोटिस जारी किया था BJP ने सीएम नायब सैनी और BJP के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के खिलाफ बयानबाजी करने पर विज को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें 3 दिन में जवाब मांगा गया था। इसके बाद उन्होंने 8 पन्ने में अपना जवाब भेजा था। हालांकि, उसके बाद विज और बड़ौली, दोनों ने इस पूरे मामले को लेकर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा।

स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों की लिस्ट में नहीं था विज का नाम स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण कार्यक्रमों की सूची में भी विज का नाम शामिल नहीं किया गया था। उन्हें अंबाला में राज्यपाल के साथ लगाया गया था। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो बाद में लिस्ट में संशोधन किया गया।

सदन में जासूसी का आरोप लगाया सदन में जासूसी का आरोप लगाकर भी विज ने राजनीतिक हलचल मचा दी थी। विपक्ष ने इसे हवा देते हुए सरकार पर तीखे वार किए थे और विज की नाराजगी को अंदरूनी असहमति का सबूत बताया।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

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