मासूम को पटक-पटककर मारने वाले दोषी को फांसी, कोर्ट का बड़ा फैसला

फिरोजाबाद ( Sahil Kasoon ) डेढ़ साल के बच्चे के हत्यारे को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। युवक ने बच्चे को जमीन पर 8 बार पटक-पटक कर मार डाला था। वह एकतरफा प्यार में बच्चे की मां से शादी की जिद कर रहा था। बच्चे की मां के मना करने के बाद से युवक गुस्से में था।
कोर्ट ने शुक्रवार को 2.45 बजे अपना फैसला सुनाया। बच्चे की हत्या 30 मई को शिकोहाबाद में हुई थी, जिसका सीसीटीवी भी सामने आया था। इसमें युवक बच्चे की हत्या करते हुए दिख रहा है। पुलिस ने हत्यारे के दोनों पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार किया था।

सरकारी वकील राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि कोर्ट ने 1 महीने 10 दिन में फैसला दिया है। पुलिस ने 6 दिन में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। बचाव की पक्ष की तरफ से दलील दी गई थी कि घटना के वक्त आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन, कोर्ट ने विराज को आरोपी माना है।
हत्यारे को फांसी की सजा सुनाने में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी फुटेज की रही। कोर्ट में जब फुटेज दिखाया गया तो आरोपी खुद अपने आप को थप्पड़ मारने लगा था। वह घटना से काफी दुखी प्रतीत हो रहा था। वकील ने कहा कि देश स्तर पर फैसले का संदेश जाएगा। साथ ही लोगों में भी विश्वास पैदा होगा।

अरांव इलाके के बामई गांव की रहने वाली पिंकी बेटी रति और डेढ़ साल के नाती आरव के साथ यादव कॉलोनी में सहेली पुष्पलता पाठक से मिलने आई थीं। पुष्पलता हाल ही में एक सड़क हादसे में घायल हुई थीं। रति की शादी करीब 3 साल पहले बदायूं के सियारण नगर निवासी सुनीत से हुई थी, लेकिन पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा।
आरोप है कि सुनीत की बुआ का बेटा बदायूं के शेखूपुर निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक लंबे समय से रति पर शादी का दबाव बना रहा था। परिवार वालों के मुताबिक, रति ने उसका प्रपोजल ठुकरा दिया था। इसके बाद से विराज नाराज था। 30 मई की दोपहर तीन बजे विराज भी पुष्पलता के घर पहुंच गया।

विराज आरव को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। कुछ दूर जाकर गली में उसने सन्नाटा देखकर बच्चे को 8 बार जमीन पर पटका। इससे आरव के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसकी मौत हो गई। इसके बाद विराज आरव को गोद में लेकर आया। उसे घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया।
परिजनों की नजर पड़ी तो वह आरव को अस्पताल लेकर गए। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी चेक किए तो उसमें विराज बच्चे को पटकता हुआ दिखाई दिया।

रति ने बताया था कि ससुराल वाले मेरे साथ मारपीट करते थे। मेरी तबीयत भी खराब रहती थी। इस कारण मेरी मां मुझे अपने साथ ले आईं थी। कुछ समय बाद मेरी पति की बुआ का बेटा विराज मुझे फोन करने लगा। एक दिन उसने कहा, वह मुझसे मिलने आ रहा। उसने मुझसे शादी करने की बात कही, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने कहा कि मैं शादीशुदा हूं। मेरा एक बच्चा भी है।
वह मेरी मौसी के यहां पहुंच गया। मेरे बच्चे को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। मुझे लगा कि रिश्तेदार है। इसलिए बिना शक के ले जाने दिया। उसने मेरे बच्चे को पटक-पटकर कर मार डाला। मेरे बच्चे की गर्दन पूरी तरह लटक रही थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी की मुठभेड़ हुई थी। पुलिस ने आरोपी के दोनों पैर में गोली मारकर पकड़ा था।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि पुलिस और अभियोजन पक्ष ने तेजी से पैरवी की। मात्र छह दिनों में 13 गवाहों की गवाही पूरी कराई गई। मजबूत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया।
मृतक आरव की मां रति शर्मा ने फैसले से पहले कहा था कि, “जिस तरह आरोपी ने मेरे बेटे को सड़क पर पटक-पटककर मार डाला, उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए। मेरा बेटा कोई गुंडा नहीं था। मुझे न्याय चाहिए। दोषी को ऐसी सजा मिले जो समाज के लिए एक नजीर बने।”




