हरियाणा के 12 हजार गेस्ट टीचर्स को बड़ी राहत! हाईकोर्ट ने सरकार की LPA की डिस्पोज

हरियाणा के करीब 12 हजार गेस्ट टीचर्स से जुड़े मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से दायर LPA (लेटर्स पेटेंट अपील) को डिस्पोज कर दिया है। मामले की सुनवाई सुखविंदर सिंह एंड अदर्स के नाम से हुई।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद गेस्ट टीचर्स में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द ही उन्हें नियमित करेगी। परमानेंट होने के बाद इन टीचर्स को सरकारी टीचर्स की तरह कई सुविधाएं मिलेंगी।
गेस्ट टीचर एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने कहा, गेस्ट टीचर पिछले 20 सालों से सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने 2014 में इन टीचर्स को नियमित करने का वादा किया था।

याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह ने बताया कि साल 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों पर वैकेंसी निकली थी। इसके लिए नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन, चयन समिति का गठन भी किया गया था। एप्लिकेंट्स की जांच और मेरिट लिस्ट जारी करने के बाद ही जॉइनिंग कराई गई थी। सुखविंदर सिंह ने बताया कि ये जॉइनिंग गेस्ट फेकल्टी के रूप में हुई। 12 हजार 700 टीचर्स को इसमें नियुक्ति दी गई। जॉइनिंग के बाद से ही टीचर्स और याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह परमानेंट नियुक्ति की मांग कर रहे थे। प्रदेश भर में प्रदर्शन भी हुए थे। साथ ही मामला हाईकोर्ट में चला गया था। हरियाणा सरकार ने अदालत में दलील दी थी, याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी। वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे परमानेंट करने के पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया।
20 साल तक सेवा ली गई: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले में कहा- सरकार खुद मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन्हें नियुक्त किया गया था। करीब 20 साल तक उनकी सेवाएं ली गई। इतने लंबे समय तक सेवाएं लेना उन्हें केवल ‘स्टॉप गैप अरेंजमेंट’ बताना पूरी तरह अनुचित है।
स्पेयर की तरह यूज नहीं कर सकते: कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं। उन्हें मनमाने ढंग से ‘स्पेयर’ की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। 20 वर्षों तक संविदा पर काम लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे।
नीतियों की वैधता पर विवाद खत्म: हाईकोर्ट ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद खत्म हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं।

2005-06 में हुई भर्ती प्रक्रिया में गेस्ट ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT), गेस्ट पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT), लेग्वेज टीचर, ड्राइंग टीचर, कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर (जहां पॉलिसी लागू होगी) भर्ती हुए थे। इसके अलावा उन टीचर्स को भी इसका लाभ मिलेगा, जिन्होंने 2014 की नियमितीकरण नीति की शर्तें पूरी की हैं।
अगर सरकार इन टीचर्स को परमानेंट करती है तो इन्हें सरकारी टीचर्स की तरह कई सुविधाएं मिलेंगी। इनमें पे स्केल, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), मेडिकल सुविधाएं, अर्न लीव (EL), मातृत्व व पितृत्व हॉलिडे, एनुअल सैलरी इन्क्रीमेंट, पेंशन संबंधी लाभ (सरकारी नियमों अनुसार), सर्विस रूल से प्रमोशन का लाभ जैसी सुविधाएं शामिल हैं।




