जींद की बेटी मनीषा बनी ISRO में रिसर्च ऑफिसर! 16 घंटे पढ़ाई कर हासिल की बड़ी सफलता
मनीषा कौशिक की इस उपलब्धि पर मनीषा के गांव गंगोली और ननिहाल कसूहन गांव में ग्रामीणों ने खुशी मनाई। ग्रामीणों ने मनीषा के मामा के घर पहुंचकर बधाई दी। कसूहन गांव की पंचायत ने मनीषा कौशिक के सम्मान में जल्द ही एक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। मनीषा पूरे हरियाणा से इसरो में रिसर्च ऑफिसर के पद पर चयनित होने वाली एकमात्र उम्मीदवार हैं।

मनीषा एक संयुक्त परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके परिवार में कुल 7 सदस्य हैं, जिसमें 2 भाई और 1 बहन शामिल हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल से ही की। 10वीं और 12वीं की परीक्षा भी गांव के स्कूल से पास की। इसके बाद उन्होंने एमडीयू रोहतक से बीएससी और एसएससी की डिग्री हासिल की।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि मनीषा घर पर ही 16 घंटे रोजाना पढ़ाई करती थीं। पढ़ाई के साथ-साथ वे घरेलू कामों में भी हाथ बंटाती थीं। उनका सपना प्रोफेसर बनने का है और पूरा परिवार उन्हें प्रोफेसर बनते देखना चाहता था। लेकिन इसरो का ऑफर मिलने के बाद पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
मनीषा के मामा विजेंद्र शर्मा ने बताया कि मनीषा हरियाणा से इसरो के हैदराबाद सेंटर में रिसर्च ऑफिसर के पद पर चयनित होने वाली इकलौती हैं। उन्होंने इस नियुक्ति को योग्यता के आधार पर मिली उपलब्धि बताया।
सरपंच प्रतिनिधि श्रीकांत ने कहा कि मनीषा कौशिक ने पूरे प्रदेश में गांव का नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि गांव में जल्द ही एक सम्मान समारोह आयोजित कर मनीषा को सम्मानित किया जाएगा।

मनीषा के मामा श्रीकांत ने उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मनीषा कौशिक ने एमडीयू रोहतक से एमएससी की डिग्री हासिल की है। उन्होंने जीआरएफ में अखिल भारतीय स्तर पर 14वां रैंक प्राप्त किया था।
श्रीकांत ने यह भी बताया कि मनीषा ने बिना किसी कोचिंग के यह सफलता हासिल की है और बचपन से ही उनका पढ़ाई में रुझान था। मनीषा की नानी इंद्रो देवी ने अपनी दयोती की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस खुशी में उनकी उम्र 10 वर्ष ओर बढ़ गई ।
ममेरी बहन खुशी ने कहा कि मनीषा से हमें भी प्रेरणा मिली है हम भी कुछ आगे करें। दोपहर को फोन आया था कि मनीषा का लिस्ट में नाम है तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। मनीषा पहले ही बोलती थी इस बार उसका चयन पक्का होगा। मेरी अच्छी तैयारी है। आत्मविश्वास बहुत है मनीषा के अंदर। ऑनलाइन कोचिंग की थी।
7 पेपर दे चुकी थी जो क्लियर हो चुके है। इंटरव्यू में वो पास हो चुकी है। कई बार उनके घर गई हॅूं। मनीषा सुबह साढ़े 5 बजे उठती थी, वो सुबह पढ़ाई करती हुई मिलती थी। घर के काम भी करती थी। पढ़ाई के बूते पर उसे नौकरी मिली है।
मनीषा ने कहा “मेरा हमेशा से सपना था कि मैं देश की सेवा कर सकूं। NET और JRF में अच्छी रैंक आने के बाद इसरो का मेल आया तो लगा जैसे सपना सच हो गया हो। मैंने गांव के स्कूल से शुरुआत की और मेहनत के बल पर यहां तक पहुंची। परिवार का साथ और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हार नहीं मानी। अब इसरो में जाकर देश के स्पेस प्रोग्राम में अपना योगदान दूंगी।”
सोशल मीडिया पर भी मनीषा को भरपूर समर्थन मिला। उनके इस उपलब्धि पर जींदवासियों, शिक्षकों और रिश्तेदारों ने बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू कर दिया है। मनीषा की यह सफलता न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे हरियाणा के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।




