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Wednesday, June 17, 2026

NCR से बाहर नहीं होंगे हरियाणा के 5 जिले:प्लानिंग बोर्ड की मीटिंग में फैसला, 4 नमो सिटी विकसित होंगे; उद्यमियों को झटका

दिल्ली में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मीटिंग में शामिल हरियाणा के सीएम नायब सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर। - Dainik Bhaskar

दिल्ली में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मीटिंग में शामिल हरियाणा के सीएम नायब सैनी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR ) की सीमा में अभी कोई बदलाव नहीं होगा। मंगलवार को दिल्ली में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की मीटिंग में यह फैसला हुआ। पहले हरियाणा के 5 जिले एनसीआर से बाहर होने की चर्चा थी।

केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर की अध्यक्ष में हुई मीटिंग के बाद सीएम नायब सैनी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा का पुराना एरिया पहले की तरह ही रहेगा। अभी प्रदेश के कुल 23 में से 14 जिले एनसीआर में थे। यदि एनसीआर का दायरा घटता तो करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी जिले बाहर हो सकते थे।

बताया जा रहा है कि एनसीआर दायरा घटना का सबसे ज्यादा असर राजस्थान पर पड़ता। बदलाव की स्थिति में राजस्थान का सिर्फ भिवाड़ी ही एनसीआर में रह जाता। राजस्थान बदलाव के पक्ष में नहीं था।

सीएम ने बताया कि एनसीआर में 4 आधुनिक नमो सिटी विकसित किए जाएंगे। हालांकि ये कहां होंगे, भी तय नहीं। इसके लिए कमेटी बनाई गई है। राज्यों से भी सुझाव मांगे गए हैं। प्लान-2041 के लिए सब कमेटी बनी है, जो 15 अगस्त तक रिपोर्ट देगी। प्लानिंग बोर्ड की 43वीं बैठक अब दिसंबर में प्रस्तावित है। साथ ही एनसीआर में B-6 से नीचे के वाहनों को लेकर परिवर्तन योजना बनाई गई है। आरआरटीएस करनाल की तरफ और मानेसर पर काम चल रहा है। कोर एरिया को लेकर भी चर्चा हुई है।

हरियाणा सरकार प्रदेश के 11 स्टेट हाईवे को दोनों ओर एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर बना सकती है।
हरियाणा सरकार प्रदेश के 11 स्टेट हाईवे को दोनों ओर एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर बना सकती है।

 यदि एनसीआर की सीमा में बदलाव पर मुहर लगती तो सबसे ज्यादा असर महेंद्रगढ़ पर पड़ता। जिले का अधिकांश क्षेत्र 100 किलोमीटर की सीमा से बाहर है। जींद भी सीमा रेखा पर होने के कारण बड़े पैमाने पर प्रभावित होता। भिवानी और चरखी दादरी के कुछ हिस्सों पर भी इसका असर पड़ता।

हरियाणा सरकार ने NCR में समावेश बनाए रखने के लिए 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है। इससे NH-44 पर स्थित करनाल और पानीपत को राहत मिल सकती है। भिवानी और चरखी दादरी को भी संबंधित राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से आंशिक लाभ मिलने की संभावना है।

पानीपत के उद्यमी एनसीआर से बाहर होने की पैरवी करते रहे हैं। उनका मुख्य कारण एनसीआर के सख्त प्रदूषण नियम, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत फैक्ट्रियों पर लगने वाले प्रतिबंध और महंगी ईंधन (PNG) पर शिफ्ट करने की बाध्यता है।

पहली बार हरियाणा का मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही समय बाद मनोहर लाल खट्टर ने करनाल और जींद को NCR में शामिल करवाने को बड़ी उपलब्धि बताया था। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में दोनों जिलों को शामिल किए जाने के बाद हरियाणा का करीब 57 प्रतिशत क्षेत्र NCR का हिस्सा बन गया था।

दिसंबर 2021 में मनोहरलाल खट्टर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि दिल्ली से 100 किलोमीटर से अधिक दूर के जिलों को NCR में रखने का कोई विशेष लाभ नहीं मिल रहा है। खट्टर ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि केवल 100 किलोमीटर के दायरे वाले क्षेत्र को ही NCR में रखा जाए और बाकी क्षेत्रों को बाहर किया जाए। खट्टर का तर्क था कि दूरस्थ जिलों को NCR के प्रतिबंध तो झेलने पड़ते हैं, लेकिन अपेक्षित विकास लाभ नहीं मिलते।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

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