करनाल में रिटायरमेंट के दिन SE गीतू राम की मौत, 3 पेज के सुसाइड नोट में 12 अधिकारियों पर आरोप | Haryana News
हरियाणा के करनाल में बिजली निगम के सस्पेंडेड एसई (सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर) गीतू राम तंवर ने सोमवार को जहर खाकर सुसाइड कर लिया। उनका शव सुबह डीएवी स्कूल के पास कार में मिला। परिजनों के अनुसार, वह सुबह करीब 7 बजे घर से निकले थे। बाद में उन्होंने फोन कर कहा था कि “अपनी आखिरी चिट्ठी देकर आता हूं।” कुछ देर बाद उनका शव कार में पड़ा मिला। उनके मुंह से झाग निकल रहा था।
पुलिस के अनुसार, शव के पास 3 पेज का सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें एक आईएएस, 3 XEN रणबीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, राज सिंह और 4 SDO सतीश गोयत, प्रदीप, आशीष महल व रूपेश पर आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा तीन अधीक्षण अभियंता (SE) मनिंदर सिंह, धर्म सुहाग, अजय कोहर और अंडर सेक्रेटरी मोहित भटनागर पर भी आरोप हैं। इसमें जातिगत भेदभाव, फर्जी वीडियो वायरल करने के संगीन आरोप लगाए गए है। अंत में पत्नी प्रीति के साथ मैसेज छोड़कर लिखा-

My Dear wife Preeti ji आप हिम्मत से काम लेना और संविधान के दायरे में रह कर कानूनी कार्रवाई करना। आपको तो पता है कि हमारा समाज तो इतना गरीब है, उसकी अब तक यह पूछने की हिम्मत नहीं है कि जिन्होंने गलत वीडियो जारी की, उनके ऊपर क्या कार्यवाई की गई है।

बता दें कि गीतू राम का 5 महीने पहले जाट-झोट्टा टिप्पणी वाला वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद सोनीपत में पोस्टिंग के दौरान उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। फिलहाल, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही जांच शुरू भी कर दी है।
एसई के सुसाइड के बाद रोते बिलखते परिजन… 3 PHOTO



गीतू राम तंवर के टाइप किए गए सुसाइड नोट में क्या…
- विशेष वर्ग को भड़काने के लिए फर्जी वीडियो चलाए गए: गीतू राम तंवर का आरोप है कि सोनीपत सर्कल के अधिकारियों इंजीनियर रणबीर देशवाल, इंजीनियर अश्विनी कौशिक आदि ने उन्हें निशाना बनाने और एक विशेष समुदाय को भड़काने की नीयत से फर्जी वीडियो चलाए। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए उन्होंने खुद माफी मांगी और MD कार्यालय में दर्जनों बार शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बावजूद, असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा मुझे ही ही निलंबित कर बिना जांच के आधारहीन चार्जशीट थमा दी गई। उनके सेवा रिकॉर्ड और आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारियों को भी अटकाया गया।
- लगातार जातीय भेदभाव किया, बॉस तक नहीं मानते : तंवर आगे लिखते है कि अनुसूचित जाति से संबंध रखने के कारण मेरे साथ लगातार भेदभाव किया। आरोपी अधिकारी खुले तौर पर SC श्रेणी के अधिकारी को अपना बॉस मानने से इंकार करते हैं और राजनीतिक एवं प्रशासनिक प्रभाव का हवाला देते हैं। वहीं दूसरी तरफ, सामान्य वर्ग से जुड़े अधिकारियों जैसे मोहित भटनागर, अजय कोहर की शिकायतों या वीडियो पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उच्च प्राधिकारी और एमडी कार्यालय पक्षपात करके दोषियों को बचा रहे हैं।
- सेवानिवृत्ति लाभों पर रोक लगाई, नोटिस भी ठंडे बस्ते में डाले : 15 साल के सेवाकाल के बाद भी न तो बहाल किया गया और न ही सेवानिवृत्ति के वैध लाभ जारी किए गए। एफआईआर संख्या 90 और पुलिस जांच के दौरान भी उन पर गलत बयान देने का दबाव बनाया गया। अनुसूचित जाति आयोग की ओर से पुलिस अधिकारियों को समन भेजे जाने के बाद भी कोई संतोषजनक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इसके अलावा, मुख्य साक्ष्य यानी वायरल वीडियो को जानबूझकर किसी फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए नहीं भेजा गया, जिससे पूरे तंत्र की नीयत पर गंभीर सवाल उठते हैं।
- सीएम से छह इंजीनियरों की संपत्ति की जांच की मांग: इस लगातार हो रहे अपमान, मानसिक तनाव और अन्याय के कारण पीड़ित और उनका परिवार अत्यधिक संकट में है। उसने मुख्यमंत्री सीएम सैनी से मांग की है कि निष्पक्ष अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की जाए, सभी मुख्य साजिशकर्ताओं इंजीनिययर रणबीर देशवाल, इंजीनियर अश्विनी कौशिक, इंजीनियर सतीश गोयत, इंजीनियर प्रदीप कुमार, इंजीनियर मनिंदर सिंह, मोहित भटनागर) को पुलिस हिरासत में लेकर उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जाए। चेतावनी दी है कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी और प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।

“इंजीनियर रणबीर देशवाल (XEN), इंजीनियर अश्विनी कौशिक (XEN), इंजीनियर सतीश गोयत (SDO), इंजीनियर प्रदीप (SDO) पिछले कोर्ट केस के कारण मुझसे गहरी रंजिश रखते हैं। कोर्ट केस के बाद ये अधिकारी मुझे अपना बॉस नहीं मानते हैं और खुले तौर पर जातिसूचक टिप्पणियों का प्रयोग करते हैं। मेरे निर्देशों की अवहेलना करते हैं। इंजीनियर मनिंदर सिंह (SE) और मोहित भटनागर (U/S) भी उनका खुले तौर पर समर्थन करते हैं। मैं हरियाणा सरकार से अनुरोध करता हूं कि निष्पक्ष जांच के लिए इन अधिकारियों को पुलिस हिरासत में लिया जाए। इंजीनियर राज सिंह (XEN), आशीष महल (SDO) और रूपेश (SDO) भी जातिगत कारण से पीछे के दरवाजे से उनका समर्थन करते हैं। मेरे सुसाइड के लिए ये सभी अधिकारी और MD पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।”
गीतू राम तंवर (58) की आज ही रिटायरमेंट थी। रिटायरमेंट वाले दिन उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से परिवार में मातम छा गया। उनके 3 बच्चे हैं। बड़ी बेटी एमबीबीएस डॉक्टर है और छोटी बेटी निति इंजीनियरिंग कर रही है। वहीं, लड़का स्वास्तिक कॉलेज में है।
गीतू राम तंवर का सुसाइड नोट..



गीतूराम ने वीडियो में क्या कहा था, सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए…
गीतूराम तंवर का जो वीडियो सामने आया था, वह सोनीपत डीसी कैंप ऑफिस का बताया गया। गीतूराम तंवर ने कहा था कि सोनीपत के तत्कालीन डीसी सुशील सारवान के कैंप ऑफिस में 22 दिसंबर को सभी अधिकारियों को बुलाया गया था। यह वीडियो उसी दौरान बनाया गया था।
वीडियो में गीतूराम तंवर ने कहा था कि पंचायत के बीच झूठ नहीं बोलना चाहिए। सांप छोटा या बड़ा कुछ नहीं होता, उसमें जहर होता है और उतना ही दंश होता है। ACR लिखने की बात पर उन्होंने कहा था कि जो लिखेंगे, गुड़ लिखेंगे, इससे ऊपर कुछ नहीं लिखेंगे।
वीडियो में गीतूराम ने कहा था कि अगर लोग संविधान को मानते तो भीमराव आंबेडकर की तस्वीर नहीं तोड़ी जाती। वहीं उनके साथ बैठे एक व्यक्ति ने कहा था कि समाज में सभी प्रकार के व्यक्ति होते हैं और चौधरी देवीलाल की तस्वीर भी तोड़ी गई थी।

गीतूराम तंवर ने कहा था कि कुछ लोग कहते हैं कि सेक्शन में जातिवाद है। अगर जातिवाद है तो खुलकर करें। उनके पास 20 अधिकारी गवाह हैं, जिनसे यह कहकर साइन करवाए जा रहे हैं कि वह अधिकारी जाटों के खिलाफ हैं।वीडियो में साइड में बैठे लोगों ने उन्हें ऐसा कहना गलत बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने कभी नहीं देखा कि वहां कास्टिज्म है। इस पर गीतूराम ने कहा था कि तुम्हारे में भले ही न हो, लेकिन हमारे में बिल्कुल खुलकर कास्टिज्म है। उन्होंने यह भी कहा था कि सोच लिया है कि अब बिल्कुल खुलकर छक्के मारेंगे।
वीडियो में गीतूराम ने कहा था कि अब तो सोच लिया है कि जाट और झोटा जहां मिलेगा, वहीं लठ मारेंगे और दोनों में से किसी को नहीं बख्शेंगे। इसके बाद वहां मौजूद लोगों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी रही।
विभाग की ओर से जारी लेटर की कॉपी…

मुख्यमंत्री नायब सैनी तक पहुंचा था मामला …
एसई गीतूराम तंवर के खिलाफ बिजली निगम सोनीपत सर्कल के विभागीय अधिकारियों ने ही मोर्चा खोला था। एक्सईएन रणवीर देशवाल, एक्सईएन अश्वनी कौशिक, गन्नौर के एसडीओ सतीश गोयत और सिटी सब डिवीजन के एसडीओ प्रदीप खोखर ने मुख्यमंत्री हरियाणा और विभाग के एमडी और पुलिस कमिश्नर ममता सिंह को इसकी लिखित शिकायत दी थी।
इस अधिकारिरयों ने आरोप लगाए थे कि एसई जबरन बिल बनवाने का दबाव डालते हैं, गाली-गलौज करते हैं और विशेष समुदाय का हवाला देकर एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देते हैं। बैठकों में अधिकारियों को ‘मुगल’ और ‘औरंगजेब’ जैसे शब्दों से संबोधित करने का भी आरोप लगाया था। अधिकारियों ने गाली-गलौज और धमकी से जुड़े कई वीडियो ओर ऑडियो रिकॉर्डिंग सबूत भी दिखाए थे। उधर, सस्पेंडेड एसई गीतू राम तंवर ने मामले में सफाई देते हुए कहा था कि यह वीडियो करीब पांच-छह माह पुराना है। उन्होंने अपने अधिकारियों को पत्र के जरिए कई बार मामले को लेकर जांच करवाने को कहा था। मगर, अधिकारियों की तरफ से बगैर जांच किया उन पर कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि वास्तविक तथ्यों को छिपाकर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष गलत तस्वीर पेश की गई, जो उनके साथ अन्याय है।




