हरियाणा में बिजली का पैरेलल लाइसेंस रद्द, 9 दिन पहले HERC ने दी थी मंजूरी; कर्मचारियों की हड़ताल के बाद बड़ा फैसला
हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (HERC) की ओर से निजी कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को बिजली सप्लाई के लिए जारी लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। आयोग ने 9 दिन पहले ही दो जिलों गुरुग्राम और नूंह में बिजली सप्लाई के लिए यह लाइसेंस जारी किया था।
इसके विरोध में बिजली कर्मचारी सड़कों पर उतर आए थे और उन्होंने 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान कर दिया था। 45 घंटे चली हड़ताल से सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज ने यूनियन नेताओं को आश्वासन दिया था कि हरियाणा में बिजली महकमे का कोई निजीकरण नहीं होगा।
इसके बाद राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल करते हुए HERC को पत्र लिखा था। इस पर आयोग के कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की बेंच ने सुनवाई करते हुए लाइसेंस को कैंसिल करने का आदेश दिया। आयोग ने कंपनी की सुनवाई की मांग को भी खारिज कर दिया।
उधर, इस फैसले पर कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घनघस ने पैरेलल लाइसेंस देना तो महज एक पहलू है। हम सरकारी बिजली कंपनियों के शेयर मार्केट में उतरने के भी खिलाफ हैं।
विनियामक आयोग की ओर से जारी आदेश की कॉपी



सरकार ने माना कि निजी कंपनी को लाइसेंस मिलने के बाद आम जनता, किसानों, उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों में भारी आक्रोश व आशंकाएं पैदा हो गई थीं।
निजी कंपनी केवल मुनाफे वाले बड़े ग्राहकों को बिजली बेचती, जिससे सरकारी बिजली कंपनियों (DHBVN/UHBVN) को भारी घाटा होता और इसका सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ता।बिजली ढांचे के दोहराव और वित्तीय नुकसान से बचने के लिए राज्य सरकार को अपनी नीति के तहत हस्तक्षेप कर इस फैसले पर रोक लगानी पड़ी।
उधर, कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घनघस ने कहा कि प्राइवेट कंपनी का पैरेलल लाइसेंस रद्द करने के आदेश आ गए हैं। प्राइवेट कंपनी को पैरेलल लाइसेंस देना तो महज एक पहलू है। हम बिजली क्षेत्र में प्राइवेटाइजेशन के अन्य पहलुओं पर भी निरंतर मंथन और चिंतन कर रहे हैं। इसके अलावा हम सरकारी निगमों के शेयर मार्केट में उतरने के भी खिलाफ हैं।




