loader image
Latest:
Thursday, June 18, 2026

CBI ने हरियाणा के IAS अधिकारी आरके सिंह को किया गिरफ्तार, 79 करोड़ रुपये फर्जी कंपनियों तक पहुंचाने का आरोप

हरियाणा के पंचकूला नगर निगम में सामने आए 79.46 करोड़ रुपए के फंड गबन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को अरेस्ट कर लिया है। सिंह के पास उस समय पंचकूला निगम कमिश्नर का चार्ज था।

सीबीआई की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यह मामला इसी साल फरवरी में सामने आए बैंक फ्रॉड का ही एक हिस्सा है। तब कई सरकारी विभागों के खाते IDFC फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस और कोटक महिंद्रा जैसे निजी बैंकों में खोले गए। इसके बाद सरकार पैसा शैल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर हुआ।

पंचकूला नगर निगम का खाता IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32 ब्रांच में था। खाते के दस्तावेजों में जानबूझकर ऐसी जानकारियां दर्ज की गईं, जिससे बाद में किए जाने वाले फर्जी लेनदेन को छिपाया जा सके। मामला सामने आने के बाद 9 अप्रैल, 2026 को सरकार ने आरके सिंह को सस्पेंड कर दिया था।

सस्पेंशन से पहले वे राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव और पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। इससे पूर्व जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक पंचकूला निगम कमिश्नर का चार्ज संभाला।

आरके सिंह की अरेस्टिंग के बाद CBI की ओर से जारी प्रेस रिलीज…

 CBI जांच में दावा किया गया है कि तत्कालीन कमिश्नर आरके सिंह ने फिक्स्ड डिपॉजिट बनवाने के नाम पर कई हस्ताक्षरित चेक बिचौलियों के माध्यम से बैंक अधिकारियों को सौंप दिए थे। इन चेकों के जरिए नगर निगम के खाते से करोड़ों रुपए निकाल लिए गए, लेकिन कोई भी फिक्स्ड डिपॉजिट नहीं बनाई गई। निकाली गई राशि को बैंक अधिकारियों द्वारा संचालित शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। एजेंसी का दावा है कि यह पूरा खेल तत्कालीन कमिश्नर और नगर निगम के सीनियर अकाउंटेंट सुरेंद्र जैन की जानकारी और सक्रिय भागीदारी से किया गया। इस मामले में सुरेंद्र की गिरफ्तारी हो चुकी है।CBI ने बताया कि जांच में आरके सिंह की सक्रिय भूमिका सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के साथ ही उनके चंडीगढ़ और करनाल स्थित आवासों पर तलाशी भी ली गई, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कथित रूप से आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए गए हैं।

 CBI ने हरियाणा सरकार के अनुरोध पर यह जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। इसी बैंक शाखा से जुड़े चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी (CSCL) और CREST चंडीगढ़ के मामलों की जांच भी एजेंसी कर रही है। दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि CREST मामले में एक वरिष्ठ IFoS अधिकारी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

पंचकूला नगर निगम का यह घोटाला हरियाणा के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल माना जा रहा है। CBI के अनुसार यह मामला सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में हुए 504 करोड़ रुपए के बड़े फंड घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों की रकम फर्जी अथवा अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में पहुंचाई गई।

CBI ने राज्य सरकार के अनुरोध पर हरियाणा के स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच अपने हाथ में ली थी। अब तक CBI इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारी, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!