जींद की बेटी कोकिला कौशिक ने जीता Silver Medal, अब 2028 पैरालंपिक में गोल्ड का लक्ष्य
जींद ( साहिल कसून ) कसूहन गांव की बेटी कोकिला कौशिक ने जापान में आयोजित पैरा एशियन गेम्स 2026 में जूडो में सिल्वर मेडल जीतकर गांव और देश का नाम रोशन किया है। रविवार को गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
कोकिला के स्वागत के लिए ग्रामीण खटकड़ टोल प्लाजा पर पहुंचे। यहां से उन्हें काफिले के साथ गांव तक लाया गया। उनकी इस उपलब्धि पर गांव के मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। कोकिला ने कहा कि सिल्वर मेडल जीतकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। गांव के लोगों ने उन्हें जो मान-सम्मान दिया, उससे वह काफी खुश हैं।

कोकिला ने कहा कि वह गोल्ड मेडल से चूक गईं, जिसका उन्हें थोड़ा अफसोस है। कहीं न कहीं कुछ कमी रह गई होगी, जिसे दूर करने के लिए वह मेहनत करेंगी। पिछली बार उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था, जबकि इस बार सिल्वर मेडल हासिल किया है।
पिछली प्रतियोगिता के बाद उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और बेहतर प्रदर्शन किया। अब उनका लक्ष्य अपनी तैयारी को और मजबूत करके गोल्ड मेडल जीतना है। उन्होंने कहा कि वह 2027 में होने वाली वर्ल्ड गेम्स प्रतियोगिता और 2028 में लॉस एंजेलिस पैरालंपिक में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए चरणबद्ध तरीके से तैयारी करेंगी।

कोकिला के पिता कृष्ण कुमार ने बताया कि उनकी बेटी ने इससे पहले पैरा एशियन गेम्स में जूडो में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस बार जापान से सिल्वर मेडल लेकर लौटी है। इससे पूरे परिवार को गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि कोकिला ने गांव से लेकर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। परिवार फिलहाल हिसार के आजाद नगर में रहता है, लेकिन इस खुशी में आजाद नगर और कसूहन गांव के लोग शामिल हुए। बेटी के सम्मान में गांव के मंदिर में भंडारा लगाया गया।
कृष्ण कुमार ने बताया कि वह भी कोकिला के साथ जापान गए थे और उन्होंने उसका मुकाबला देखा था। उन्हें उम्मीद थी कि कोकिला इस बार गोल्ड मेडल जीतेगी, क्योंकि वह पहले भी अपनी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को हरा चुकी थी। हालांकि, मुकाबले में थोड़ी सी चूक रह गई और गोल्ड हाथ से निकल गया। उन्होंने कहा कि ब्रॉन्ज से सिल्वर तक का सफर भी बड़ी उपलब्धि है। अब परिवार को उम्मीद है कि कोकिला 2027 की वर्ल्ड गेम्स प्रतियोगिता और 2028 के पैरालंपिक में देश के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल करेगी।

कोकिला की मां सुमन शर्मा ने कहा कि बेटियों को कभी बेटों से कम नहीं आंकना चाहिए। उन्हें भी आगे बढ़ने का पूरा मौका देना चाहिए। बेटियां मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि कोकिला दृष्टिबाधित है, लेकिन परिवार ने कभी उसकी इस स्थिति को उसकी कामयाबी के रास्ते में नहीं आने दिया। आज उसकी उपलब्धियों पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है।
सुमन शर्मा ने बताया कि कोकिला इससे पहले भी कई मेडल जीत चुकी है। वर्ष 2023 में जब उसने ब्रॉन्ज मेडल जीता था, तब भी गांव में उसका स्वागत किया गया था और भंडारा लगाया गया था। इस बार सिल्वर मेडल जीतने पर गांव के लोगों में और ज्यादा उत्साह है।
कोकिला की बड़ी बहन सफलता शर्मा ने बताया कि वह भी पहले जूडो खेलती थीं, लेकिन चोट लगने के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। इसके बाद कोकिला ने जूडो खेलने की इच्छा जताई। शुरुआत में परिवार को चिंता थी कि उसे दिखाई नहीं देता, इसलिए खेल के दौरान चोट लग सकती है। हालांकि, कोकिला अपनी जिद पर अड़ी रही और परिवार ने उसे प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया।
सफलता शर्मा ने कहा कि कोकिला ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करके यह मुकाम हासिल किया है। अब परिवार चाहता है कि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीते और विदेशों में भी भारत का राष्ट्रगान बजे। कोकिला की सफलता से गांव की बेटियों और युवाओं को भी खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।




