रोहतक PGI के डॉक्टरों ने बचाई 3 साल के मासूम की जान
रोहतक ( Sahil Kasoon) पैर का ऑपरेशन कराने गए एक तीन साल के बच्चे की सांस की नली से लोहे का पेंच निकला है। बेड से गिरकर बच्चे की जांघ की हड्डी टूट गई थी। इसके बाद उसे नारनौल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने पैर के साथ बच्चे की छाती का भी एक्सरे किया। एक्सरे में रिपोर्ट में बच्चे की सांस की नली में एक पेंच फंसा मिला। इसके बाद उसे रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया।
यहां डॉक्टरों ने तुरंत एन्डोस्कॉपी के जरिए सांस की नली से पेंच निकालने का प्लान बनाया। बच्चे का ऑपरेशन कर पेंच निकाला गया। डॉक्टरों का कहना है कि पेंच सांस की नली से होते हुए फेफड़ों में फंस गया था। कभी भी सांस की नली को ब्लॉक कर सकता था।

PGI के ईएनटी डिपॉर्टमेंट के डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि 13 जुलाई को बच्चा बेड से नीचे गिर गया था। इसमें बच्चा की जांघ की हड्डी टूट गई थी। पहले बच्चे का नारनौल अस्पताल में ही इलाज चला। वहां प्लास्टर लगा दिया गया। इसके बाद 22 जुलाई को बच्चे को यहां भर्ती कराया गया।
डॉ. रमन के अनुसार, नारनौल में जांघ के ऑपरेशन से पहले बच्चे का रूटीन एक्सरे भी कराया गया। एक्सरे में फेफड़े के निचले हिस्से में एक पेंच फंसा दिखाई दिया। इसके बाद बच्चे को यहां रेफर कर दिया गया। बच्चे के घरवालों ने बताया कि उन्हें बच्चे के पेंच निगलने की कोई जानकारी नहीं थी। बच्चे को कोई अंदरूहनी घाव भी नहीं था। न ही कोई लक्षण थे।

डॉ. रमन बडेरा ने बताया कि रीजिड ब्रोंकोस्कोपी तकनीक के जरिए जनरल एनेस्थीसिया में ऑपरेशन किया। इस प्रक्रिया में गले के रास्ते एक पतली दूरबीन डालकर बिना शरीर पर कोई चीरा लगाए पेंच को ढूंढा गया। करीब 2 घंटे चला ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। अब बच्चा तेजी से रिकवर कर रहा है।
डॉ. रमन बडेरा ने बताया कि बच्चे ने करीब दो से तीन महीने पहले ही इस कील को निगला होगा, जो सांस की नली में फेफड़े के निचले हिस्से में फंस गई। सांस की नली में कील पुरानी होने से बार-बार निमोनिया या पेट दर्द, खांसी जुकाम जैसी बीमारी होती है। मगर बच्चे को ऐसा कोई लक्षण नहीं था।

डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि सांस की नली से पेंच निकालते समय काफी सावधानी रखनी पड़ी। अगर पेंच का नुकीला हिस्सा जरा भी सांस की नली से टकरा जाता, तो नली फटने से बच्चे की मौत तक हो सकती थी। इसलिए इसे एनडोस्कोपी के जरिए बाहर निकाला गया।
डॉ. रमन के अनुसार, अक्सर 6 माह से बड़े बच्चे हर चीज मुंह में डालकर चेक करते हैं। पेंच, बोल्ट, सिक्के, बैटरी, खिलौनों के छोटे पार्ट्स बच्चे मुंह में डालते हैं। आशंका है कि इस बच्चे ने भी खेल-खेल में पेंच निगल लिया होगा।




