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कैथल में डेरे के साधु का मर्डर! शरीर पर चोट के निशान, बाल उखाड़े; मुख्य महंत समेत कई साधु हिरासत में

गांव बाबा लदाना में बाबा राजपुरी के डेरे में साधु की हत्या कर दी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनके शव को सीधा ही रखा गया है, लेटाया नहीं गया है। इनसेट में मुख्य महंत दूज पुरी, जिन पर आरोप लगाया है। - Dainik Bhaskar

गांव बाबा लदाना में बाबा राजपुरी के डेरे में साधु की हत्या कर दी गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनके शव को सीधा ही रखा गया है, लेटाया नहीं गया है। इनसेट में मुख्य महंत दूज पुरी, जिन पर आरोप लगाया है।

हरियाणा के कैथल के गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरे में एक साधु की हत्या कर दी गई। डेरे में बने विश्राम गृह में उनका शव पड़ा मिला। शरीर पर चोट के निशान मिले और बाल भी उखाड़े हुए थे। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अनुयायी मौके पर पहुंचे और हंगामा किया।

आरोप लगाया कि डेरे के मुख्प महंत ने साधु की पीट-पीटकर हत्या की है। मामला धर्म और हत्या से जुड़ा होने के कारण सीआईए, एंटी व्हीकल थेफ्ट स्टाफ और सदर थाना पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंची और वारदात स्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने डेरे के मुख्य महंत सहित कुछ साधुओं को भी डिटेन कर लिया, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

करीब 400 साल पुराने इस डेरे राजपुरी का इतिहास काफी गौरवमयी रहा है। विश्व में प्रसिद्धि हासिल करने वाले अध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोता पुरी इसी डेरे के सातवें महंत थे। रामकृष्ण परमहंस ही स्वामी विवेकानंद के गुरु हैं।

आरोप है कि साधु की हत्या के साथ उनके सिर के बाल भी उखाड़ दिए गए। जंजीर से भी उन्हें बांधा गया था।
आरोप है कि साधु की हत्या के साथ उनके सिर के बाल भी उखाड़ दिए गए। जंजीर से भी उन्हें बांधा गया था।
पुलिस की ओर से मुख्य महंत दूजपुरी सहित कई साधु हिरासत में लिए गए हैं।
पुलिस की ओर से मुख्य महंत दूजपुरी सहित कई साधु हिरासत में लिए गए हैं।
साधु शिव शंकर पुरी की हत्या के बाद डेरे में मौजूद भीड़।
साधु शिव शंकर पुरी की हत्या के बाद डेरे में मौजूद भीड़।

प्राथमिक जांच में पता चला है कि मृतक साधु का नाम शिव शंकर पुरी है, जो करीब तीन महीने पहले ही यूपी से आए थे। वर्तमान में डेरे में मुख्य महंत दूजपुरी के पास रह रहे थे। सुबह ग्रामीण पूजा पाठ के लिए पहुंचे तो उन्हें शिव शंकरपुरी मृत पड़े मिले।

साधु की मौत की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में उनके अनुयायी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य महंत ने शिव शंकरपुरी की हत्या की है। पहले उनहें डेरे में ही रस्सियों और जंजीरों से बांध दिया और पीट-पीटकर हत्या कर दी। मारपीट के दौरान उसके सिर और दाढ़ी के बाल भी उखाड़े गए।

इसकी सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। एसएचओ कुलदीप सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि साधु शिव शंकरपुरी का डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी के साथ सिगरेट उठाने को लेकर विवाद हुआ था। शिव शंकरपुरी महंत की सिगरेट उठा रहा था, जिनका झगड़ा हो गया।

सदर थाना एसएचओ कुलदीप सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने पूछताछ के लिए महंत सहित कुछ साधुओं को डिटेन किया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरा।
गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरा।

गांव बाबा लदाना में 1690 में बाबा राजपुरी का जन्म हुआ था। उन्होंने करीब आठ साल की उम्र में गांव बात्ता में जाकर चोला धारण किया और संत सरस्वती पुरी को गुरु बनाया। इसके बाद उन्होंने गांव बात्ता में गुरु से अलग डेरा बनाया। बाबा राजपुरी 52 शक्तिपीठ में शामिल माता हिंगलाज को काफी मानते थे। बताते है कि करीब 300 साल पहले गांव बाबा लदाना में इस डेरे की स्थापना हुई। यहां बाबा राजपुरी के 360 धूणे हैं।

डेरा बाबा राजपुरी के पहले महंत सिद्ध पुरी थे, जिन्होंने 1709 में समाधी ली। इनके बाद महंत भंडार पुरी ने 1745, महंत शुद्ध पुरी ने 1778, महंत भण्डार पुरी ने 1803, महंत ज्ञान पुरी ने 1871, महंत तोतापुरी ने 1884, महंत चेतनपुरी ने 1897, महंत हजारी पुरी ने 1905 में समाधी ली। अब वर्तमान में डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी हैं।

डेरे में प्रतिदिन चार बार आरती होती है। पहली आरती सुबह चार बजे, दूसरी भोग आरती दोपहर 11:30 बजे, तीसरी आरती तीन बजे और इसके बाद संध्याकालीन आरती होती है। 31 ज्योत जगाई जाती है। डेरा राजपुरी बाबा लदाना की पूजा, बात्ता डेरा का भंडारा और क्योड़क की अलख काफी प्रसिद्ध है। डेरे पर दशहरे से अगले दिन विशाल मेला लगता है, जिसमें श्रद्धालु घी, दूध चढ़ाते हैं। चांदनी एकादशी पर भी यहां मेला लगता है।

डेरे के पास करीब 80 एकड़ जमीन और 135 पशु हैं। कोई पशु खरीदा नहीं गया है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु पशुओं को दान में देकर जाते हैं। डेरा परिसर में 400 साल पुराना जाल (जिसे स्थानीय भाषा में ‘जैल’ या ‘पीलू’ भी कहा जाता है) का पेड़ है।

Sahil Kasoon

The Air News (Writer/Editer)

Sahil Kasoon

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