अमेरिका से करनाल पहुंचा युवक का शव: डंकी रूट से गया था विदेश, सड़क हादसे में मौत; गांव में नम आंखों से अंतिम संस्कार
करनाल ( Sahil Kasoon ) पाढा गांव के 27 वर्षीय युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत के बाद उसका शव पैतृक गांव पहुंचा। शव के पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद गांव की शिवपुरी में अंतिम संस्कार किया गया।
जहां पर अंकित के चचरे भाई नीतिन ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं के लोग भी पहुंचे और घटना को दुखद बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
गांव पाढा निवासी 27 वर्षीय अंकित की करीब 2 हफ्ते पहले अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। हादसे की खबर मिलते ही परिवार गहरे सदमे में चला गया था। अंकित वहां ट्रक ड्राइवर के रूप में काम करता था और अपने बड़े भाई के साथ रह रहा था। उसके पिता सत्यवान कालीरमन गांव में खेतीबाड़ी करते हैं।

परिजनों के अनुसार अंकित करीब 5 साल पहले डंकी रूट के जरिए अमेरिका गया था, जिस पर लगभग 40 लाख रुपए खर्च हुए थे। विदेश पहुंचने के बाद उसने ट्रक चलाना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी। उसने वहां अपना मकान भी ले लिया था। करीब 2 साल पहले ही अंकित अमेरिका में ग्रीन कॉर्ड हुआ था।

अंकित का बड़ा भाई पहले सेना में था, लेकिन 6-7 साल पहले वह भी अमेरिका चला गया और ट्रक चलाने लगा। बाद में उसने अंकित को भी अपने पास बुला लिया। दोनों भाई अमेरिका में साथ रहते थे। परिवार के लोगों ने बताया कि अंकित ने खुद को स्थापित करने के बाद घर की जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी थीं।

जानकारी के अनुसार हादसे वाले दिन अंकित ट्रक लेकर जा रहा था। इसी दौरान अचानक ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर वहां की स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा।

हादसे के बाद परिवार और प्रशासन ने मिलकर शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। शव को भारत लाने में करीब 20 से 30 लाख रुपए खर्च हुए, जो परिवार, सगे संबंधियों और समाज के लोगों ने सहयोग से जुटाए।

दाह संस्कार में पहुंचे भाजपा नेता जगदेव पाढा और धर्मबीर पाढा ने कहा कि सरकार के पास रोजगार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रोजगार न मिलने के कारण युवाओं को जमीन बेचकर विदेश जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि डंकी रूट से जाने वाले युवाओं के शव ताबूत में वापस आते हैं। अगर देश में ही रोजगार मिलता तो युवाओं को जान जोखिम में डालकर बाहर नहीं जाना पड़ता




