लेह-लद्दाख में सेना के जवान नरेश लाठर शहीद
जींद ( साहिल कसून ) शादीपुर गांव निवासी सेना के हवलदार नरेश लाठर (42) का लेह-लद्दाख में हार्ट अटैक से निधन हो गया। नरेश कुछ ही महीनों में नायब सूबेदार के पद पर प्रमोट होने वाले थे। 15 नवंबर को उन्हें घर आना था, इसके लिए छुट्टी की एप्लिकेशन भी दी थी।
आज गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर गांंव लाया गया। शव आने के साथ पड़ोसी गांव ब्राह्मणवास से उनके गांव शादीपुर तक पहले बाइक रैली निकाली गई।
इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी। 13 वर्षीय बेटे अरमान ने उन्हें मुखाग्नि दी। बुधवार दोपहर सेना के अधिकारियों से परिवार को उनके निधन की सूचना मिली थी।


परिवार में उनकी 39 वर्षीय पत्नी प्रीति, बेटा अरमान (13) और बेटी चाहत (15) हैं। पत्नी प्रीति गृहणी हैं। बेटा अरमान नौवीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि बेटी चाहत 11वीं कक्षा की छात्रा है। मंगलवार को परिवार से उनकी आखिरी बार बात हुई थी। इसी दौरान उन्होंने अपने घर आने के बारे में बताया था। करीब एक महीने पहले ही वह छुट्टी काटकर ड्यूटी पर लौटे थे।
उनके चाचा धर्मबीर लाठर का कहना है- नरेश सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेना चाहते थे, मगर अधिकारियों ने समझाया कि कुछ ही महीनों में प्रमोशन मिल जाएगा। इसके बाद नरेश ने VRS की एप्लिकेशन वापस ली।

शहीद नरेश के चाचा धर्मबीर लाठर ने बताया कि नरेश ने सेना से सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन दिया था। अगर उनकी एप्लिकेशन अक्सेप्ट हो जाती तो वे दो माह बाद रिटायर हो जाते।
हालांकि इससे पहले ही सेना के अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि उनका प्रमोशन हो जाएगा और वे सेना में सेवाएं जारी रख सकते हैं। इसके बाद नरेश ने अपनी एप्लिकेशन वापस ले ली। प्रमोशन के बाद वे सेना में नायब सूबेदार बन जाते।

नरेश के परिवार में पत्नी प्रीति, 15 वर्षीय बेटी चाहत और 13 वर्षीय बेटा अरमान हैं। चाहत 11वीं और अरमान 9वीं कक्षा में पढ़ता है। नरेश के पिता सतबीर का करीब आठ साल पहले निधन हो चुका है। तीन भाई-बहनों में नरेश सबसे छोटे थे। बड़े भाई दिनेश खेती के साथ अपना कारोबार करते हैं। पत्नी प्रीति गांव में बच्चों के साथ ही रहती है।
शहीद नरेश लाठर के बेटे अरमान ने कहा कि मैं भी सैनिक स्कूल में पढ़ रहा हुं। उनके पिता से प्रेरणा लेकर वो भी सैनिक बनकर देश की सेवा करेंगे।
चचेरे भाई नरेंद्र ने बताया कि नरेश की परिवार से लगभग रोजाना फोन पर बात होती थी। ताऊ जयकरण पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे हैं। उनसे मिलने के लिए नरेश ने अगले सप्ताह घर आने का कार्यक्रम बनाया था। उन्होंने छुट्टी के लिए एप्लिकेशन दी थी और 15 नवंबर की टिकट भी बुक करवा ली थी।
3 नवंबर की शाम को उन्होंने भाई दिनेश से फोन पर बात की थी। इस दौरान रिटायरमेंट का आवेदन वापस लेने, प्रमोशन और घर आने की योजना के बारे में भी बताया था। नरेश 2004 में सेना में भर्ती हुए थे।





