पानीपत CRPF जवान तेजपाल सिंह का श्रीनगर में निधन
देश की आंतरिक सुरक्षा में मुस्तैद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जांबाज जवान का ड्यूटी के दौरान अचानक हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। मृतक जवान तेजपाल सिंह पानीपत के गांव गढ़ सरनाई के रहने वाले थे, जो वर्तमान में श्रीनगर में तैनात थे। सोमवार को ही वह अपने परिवार से मिलकर और छुट्टी खत्म कर वापस ड्यूटी पर लौटे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
जवान तेजपाल का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह 9 बजे श्रीनगर से हवाई मार्ग द्वारा दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है। दोपहर बाद उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गढ़ सरनाई पहुंचेगा, जहां पूरे राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पारिवारिक लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, तेजपाल सिंह देश सेवा के जज्बे के साथ साल 2001 में सीआरपीएफ (CRPF) में बतौर सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। अपनी कर्मठता और बहादुरी के बूते वे लगातार विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बीते दिनों वे अपने गांव गढ़ सरनाई छुट्टी पर आए हुए थे। इसी सोमवार को ही वे अपनी छुट्टी पूरी कर वापस श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) अपनी यूनिट में ड्यूटी पर तैनात हुए थे।
शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे ड्यूटी के दौरान अचानक तेजपाल की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़े। यूनिट के साथी जवानों ने तुरंत उन्हें नजदीकी सैन्य अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया। लेकिन इलाज के दौरान हृदय गति रुक जाने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया।
जवान तेजपाल सिंह अपने पीछे एक हंसता-खेलता परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनकी पत्नी और तीन होनहार बच्चे शामिल हैं। तेजपाल अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों को उच्च पदों पर देखना चाहते थे। उनके दो बच्चे वर्तमान में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहे हैं, जबकि उनका छोटा बेटा देश का बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए सिविल सेवा (UPSC) की कोचिंग ले रहा है।
जैसे ही शुक्रवार देर शाम सीआरपीएफ मुख्यालय की ओर से तेजपाल सिंह के निधन की आधिकारिक सूचना उनके परिजनों को मिली, तो घर में मातम पसर गया। इस दुखद खबर से पूरे गढ़ सरनाई गांव सहित आस-पास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है।
ग्रामीणों ने बताया कि तेजपाल बेहद मिलनसार और देशभक्त इंसान थे, जब भी छुट्टी आते थे, गांव के युवाओं को सेना और अर्धसैनिक बलों में जाने के लिए प्रेरित करते थे। आज पूरा गांव अपने इस वीर सपूत के अंतिम दर्शनों और उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने के लिए पलकें बिछाए इंतजार कर रहा है।




